Close Menu
Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Johar LIVEJohar LIVE
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    • होम
    • जेपीएससी / जेएसएससी
    • क्राइम
    • राजनीति
    • बिजनेस
    • झारखंड
    • आदिवासी
    • बिहार
    • स्वास्थ्य
    • पर्यावरण
    • स्पेशल स्टोरी
    • खेल-सिनेमा
    Johar LIVE
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Home»आदिवासी»झारखंड के कोरवा से पहाड़िया तक, सात आदिम जनजातियों की बस्तियों में पहुंची जोहार लाइव की टीम; अब जनप्रतिनिधियों से पूछे सवाल, जानिये किसने क्या कहा
    आदिवासी

    झारखंड के कोरवा से पहाड़िया तक, सात आदिम जनजातियों की बस्तियों में पहुंची जोहार लाइव की टीम; अब जनप्रतिनिधियों से पूछे सवाल, जानिये किसने क्या कहा

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkOctober 10, 2026No Comments6 Mins Read3
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Email Copy Link

    टीम जोहार लाइव

    झारखंड में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) की जमीनी स्थिति जानने के लिए जोहार लाइव की टीम ने पिछले दिनों में सात जनजातीय समुदायों की बस्तियों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझा. लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के ग्वालाखाड़ और ढोढ़ी कोना गांव, मनिका प्रखंड के तेहराई गांव, बालूमाथ प्रखंड की झाबर बिरहोर बस्ती और दाउना गांव में बिरजिया समुदाय की समस्याएं सामने आईं. वहीं, संताल परगना के पहाड़िया बहुल इलाकों में भी लोगों की स्थिति को समझने की कोशिश की गई.

    ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान पहचान, पेयजल, बिजली, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन, आवास और रोजगार की कमी जैसे मुद्दे सामने आए. कहीं लोग स्वच्छ पेयजल के अभाव में चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं, तो कहीं बरसात में गांवों का संपर्क कट जाता है. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, वनाधिकार पट्टा नहीं मिलने, रोजगार के लिए पलायन और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आईं. पहाड़िया समुदाय के कुछ लाभार्थियों ने सरकारी योजनाओं की राशि के भुगतान में कथित गड़बड़ी की शिकायत की. एक और समस्या सामने आई जिसमें आदिम जनजातियों ने बताया कि उनके नाम से उनके मूल पहचान यानी टाइटल को हटाया जा रहा है और वो बेबस होकर बस देख रहे हैं.

    ये भी पढ़ें : जोहार लाइव विशेषः झारखंड के आदिम जनजातियों के सरकारी दस्तावेजों में मिटाया जा रहा टाइटल; असुराईन, बिरिजियाइन, कोरवाइन बनाई जा रही है ‘देवी’; ग्राउंड रिपोर्ट

    इन जमीनी समस्याओं को सामने लाने के बाद जोहार लाइव ने राज्य के मंत्रियों, विधायकों, पूर्व विधायकों सामाजिक कार्यकर्ताओं आदि से बात की. ताकि आदिम जनजातियों, जिनकी राजनैतिक पहुंच लगभग ना के बराबर है, उनकी आवाज को कोई अपना ले. उनकी समस्याओं पर ये समाज गंभीरता से विचार करे. हमने राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू, पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग, गुमला से इन मुद्दों पर उनका नजरिया जाना.

    ये भी पढ़ें : अंतिम आदिवासी भाग-1: आदिम जनजाति कोरवा भी हो रहे अब छुआछूत के शिकार, स्कूल में बरतन अलग, गांव में पानी भरने का समय अलग

    हमने उनसे सवाल किया कि आखिर कैसे सुधरेगी ये स्थिति, इन सब के जिम्मेदार कौन हैं, क्या सुझाव देना चाहेंगे आप?

    कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा, आप मुझे अपनी स्टोरी भेजिए. मैं इसे खुद धरातल पर चेक करूंगी, उसके बाद ही इसका जवाब दूंगी.”

    ये भी पढ़ें : अंतिम आदिवासी भाग-2: असुर जनजाति के जिस हुनर से 2.22 लाख करोड़ की कंपनी बनी टाटा स्टील, आज भी बिजली का एक बल्ब तलाश रहा उन असुरों का गांव

    पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए पहले उनकी वास्तविक स्थिति को समझना और फिर प्राथमिकता तय करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि खबर रिपोर्टिंग करने से पहले संबंधित जनप्रतिनिधियों को भी समस्याओं की जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि समाधान की दिशा में पहल की जा सके.

    ये भी पढ़ें : अंतिम आदिवासी भाग-3: जंगल के मालिक को आज तक है एक इंच वनपट्टे का इंतजार, कहानी आदिम जनजाति परहिया की

    पहाड़िया समुदाय के लाभार्थियों की सरकारी योजनाओं की राशि में कथित गड़बड़ी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई. वहीं, लातेहार में आदिम जनजातियों से जुड़ी समस्याओं और कथित सामाजिक भेदभाव के सवाल पर उन्होंने कहा कि संताल परगना क्षेत्र में छुआछूत या नाम बदलने जैसी समस्याएं नहीं हैं.

    पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव ने जिला प्रशासन की जवाबदेही पर उठाए सवाल

    गुमला के पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव ने कहा कि आदिम जनजातियों की बस्तियों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि जहां सड़क नहीं है, वहां सड़क बननी चाहिए. खेती करने वाले परिवारों को सोलर पंप के माध्यम से सिंचाई की सुविधा दी जानी चाहिए और जहां चापाकल नहीं है, वहां पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए.

    ये भी पढ़ें : अंतिम आदिवासी भाग-4: हाईवे किनारे बसे बिरहोर, 14 किमी दूर कोयला खदान, फिर भी न स्कूल, न साफ पानी, न काम; बिहार के ईंट-भट्ठों पर कट रही जिंदगी

    उन्होंने कहा कि आदिम जनजातियों के हित में काम करने के लिए नियम-कानून की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा नहीं किया जाना चाहिए. उनके मुताबिक, जिला स्तर पर एकीकृत जनजातीय विकास अभिकरण (ITDA) के माध्यम से उपलब्ध राशि का इस्तेमाल इन समुदायों का जीवन स्तर सुधारने के लिए किया जाना चाहिए.

    जब उनसे पूछा गया कि यदि आदिम जनजातियों के लोग अब भी चुआं का पानी पीने को मजबूर हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है, उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में जिला उपायुक्त और ITDA की भूमिका पर सवाल उठता है. यदि जिला प्रशासन समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहा है, तो राज्य सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए.

    रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन और आवास की कमी पर भी पूर्व विधायक ने चिंता जताई. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना जैसी योजनाओं के बावजूद यदि जरूरतमंद परिवारों को घर नहीं मिल रहा है, तो राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को इसकी समीक्षा करनी चाहिए.

    राशन वितरण के संबंध में उन्होंने आदिम जनजातियों के लिए डाकिया योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि पात्र परिवारों तक राशन नहीं पहुंच रहा है, तो यह गंभीर समस्या है. उन्होंने सरकार के विभिन्न विभागों से सवाल पूछने के लिए मुद्दों की सूची भी मांगी, ताकि संबंधित विभागों से जवाब मांगा जा सके.

    ग्लैडसन डुंगडुंग बोले- जन आंदोलन से ही बदलेगी स्थिति

    सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने आदिवासी समुदायों की समस्याओं के समाधान के लिए जन आंदोलन की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि झारखंड में अफसरशाही का दबदबा है और सरकारी तंत्र योजनाओं के क्रियान्वयन के बजाय लूट की व्यवस्था बन गया है. उनके अनुसार, योजनाएं बनती हैं, लेकिन उनका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचता.

    ये भी पढ़ें : अंतिम आदिवासी भाग-5: सर पर 33 किलो राशन और ढ़ाई घंटे का सफर, बरसात में दो महीने लॉकडाउन, 18 साल से नियुक्ति पत्र लिए घूम रहे आदिम जनजाति बिरिजिया के लोग

    डुंगडुंग ने खूंटी के एक पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त से क्षेत्र में सामुदायिक भवनों की कमी के बारे में पूछा, तो पहले उन्हें बताया गया कि सामुदायिक भवन उपलब्ध हैं. लेकिन जब उन्होंने एक-एक कर उनकी वास्तविक स्थिति बताई, तब अधिकारी ने काम कराने की बात कही.

    उन्होंने झारखंड सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए. डुंगडुंग के मुताबिक, सरकार मंईयां सम्मान योजना पर केंद्रित है, जबकि वनाधिकार पट्टा, पलायन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पेयजल जैसी समस्याओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है. उनका मानना है कि इन समस्याओं का समाधान केवल सरकारी योजनाएं बनाने से नहीं, बल्कि लोगों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए सामूहिक आवाज उठाने से होगा.

    जोहार लाइव समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा. उनकी समस्याओं, मुद्दों की तह तक जाएगा. कोशिश इतनी भर है कि सूरत बदलनी चाहिए.

    Also Read : अंतिम आदिवासी भाग-6: बैंकिंग बिचौलियों के मकड़जाल में फंसा पहाड़िया आदिम जनजाति, मिलते ही गायब हो जा रहे मंईयां सम्मान सहित विभिन्न योजनाओं के पैसे

    Johar @8 AM The Last Tribe अंतिम आदिवासी
    Follow on Facebook Follow on X (Twitter) Follow on Instagram Follow on YouTube Follow on WhatsApp Follow on Telegram
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram WhatsApp Email Copy Link
    Previous Articleनौ दिनों तक मां की आराधना कैसे करें, पूजा में किन बातों का ध्यान रखें, बता रहे हैं कामाख्या मंदिर के चर्चित उपाशक शैलेश उपाध्याय

    Related Posts

    जोहार ब्रेकिंग

    नौ दिनों तक मां की आराधना कैसे करें, पूजा में किन बातों का ध्यान रखें, बता रहे हैं कामाख्या मंदिर के चर्चित उपाशक शैलेश उपाध्याय

    October 10, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड : पलामू जिले के चार कैटेगरी-2 बालू घाटों की सफल नीलामी, राज्य सरकार को लगभग 26.59 करोड़ की राजस्व प्राप्ति

    October 9, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    टाटा मोटर्स कर्मचारी को तलाक के बाद पत्नी को देने होंगे 20 लाख रुपये, झारखंड हाईकोर्ट ने तय किया गुजारा भत्ता जमशेदपुर की महिला को एकमुश्त मिलेगी स्थायी गुजारा भत्ते की राशि, 12 महीने में चार किस्तों में भुगतान का आदेश

    October 9, 2026
    आदिवासी

    जोहार लाइव इंपैक्टः लातेहार पुलिस का आदिवासी महिला के साथ अत्याचार मामला, अनुसूचित जनजाति आयोग लेने जा रहा स्वतः संज्ञान

    October 9, 2026
    जोहार ब्रेकिंग

    जोहार लाइव एक्सक्लूसिवः एसीबी कोर्ट का कड़ा रुख, झारखंड के चर्चित पुलिस अफसर मोहन पांडे के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति पर ‘डीम्ड सेंक्शन’ का सिद्धांत खारिज, एसपी को फिर से लिखा गया पत्र

    October 9, 2026
    आदिवासी

    झारखंड : लातेहार में कोयला ब्लॉक के विरोध में NH-22 जाम, ग्रामसभा के फैसले की अनदेखी का आरोप

    October 9, 2026
    Latest Posts

    झारखंड के कोरवा से पहाड़िया तक, सात आदिम जनजातियों की बस्तियों में पहुंची जोहार लाइव की टीम; अब जनप्रतिनिधियों से पूछे सवाल, जानिये किसने क्या कहा

    October 10, 2026

    नौ दिनों तक मां की आराधना कैसे करें, पूजा में किन बातों का ध्यान रखें, बता रहे हैं कामाख्या मंदिर के चर्चित उपाशक शैलेश उपाध्याय

    October 10, 2026

    झारखंड : पलामू जिले के चार कैटेगरी-2 बालू घाटों की सफल नीलामी, राज्य सरकार को लगभग 26.59 करोड़ की राजस्व प्राप्ति

    October 9, 2026

    टाटा मोटर्स कर्मचारी को तलाक के बाद पत्नी को देने होंगे 20 लाख रुपये, झारखंड हाईकोर्ट ने तय किया गुजारा भत्ता जमशेदपुर की महिला को एकमुश्त मिलेगी स्थायी गुजारा भत्ते की राशि, 12 महीने में चार किस्तों में भुगतान का आदेश

    October 9, 2026

    जोहार लाइव इंपैक्टः लातेहार पुलिस का आदिवासी महिला के साथ अत्याचार मामला, अनुसूचित जनजाति आयोग लेने जा रहा स्वतः संज्ञान

    October 9, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    © 2026 Johar LIVE. | About Us | AdSense Policy | Privacy Policy | Terms and Conditions | Contact Us.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.