जोहार लाइव ब्यूरो
कल यानी 11 अक्टूबर को नवरात्र की शुरूआत हो रही है. नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा सिर्फ विधि-विधान नहीं, बल्कि श्रद्धा, साधना और नियमों से जुड़ी परंपरा है. आखिर नौ दिनों तक मां की आराधना कैसे करें, पूजा में किन बातों का ध्यान रखें और मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए? जोहार लाइव के विशेष आग्रह पर मां कामाख्या के चर्चित उपाशक शैलेश उपाध्याय उर्फ नेपाली बाबा ने बताया कि नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा किस विधि से करनी चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.
जोहार लाइव अगले दस दिनों तक आपके लिए पूजा विशेष ऋंखला लेकर आएगा. ताकि पाठक पूजा के विधि की जानकारी रखकर खुद को और समृद्ध कर सकें. पहली कड़ीः-
नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम रूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. इनकी पूजा विधि इस प्रकार है:
पूजा की सामग्री और तैयारी
स्नान और वस्त्र: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और इस दिन सफेद या पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है.
घटस्थापना (कलश स्थापना): एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें. एक मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उस पर जल, सुपारी, दूर्वा, अक्षत (चावल) और सिक्का डालकर कलश स्थापित करें. कलश के ऊपर आम के पत्ते और लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें.
अखंड ज्योति: पूजा स्थल पर घी या तेल का दीपक (अखंड ज्योति) प्रज्वलित करें.
पूजा विधि
1. आवाहन: हाथ में लाल फूल लेकर मां शैलपुत्री का ध्यान करें और उनका आह्वान करें.
2. षोडशोपचार पूजन: मां को गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन और सफेद या पीले रंग के फूल (विशेषकर गुड़हल या सफेद पुष्प) अर्पित करें.
3. भोग (नैवेद्य): मां शैलपुत्री को गाय के शुद्ध घी या घी से बनी चीजों (जैसे खीर या सफेद मिठाई) का भोग अत्यंत प्रिय है.
4. मंत्र जाप: मां के मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें:
5. मंत्र: ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
2.प्रार्थना मंत्र: वंदे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
5. आरती और पाठ: अंत में मां शैलपुत्री की आरती उतारें, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और प्रसाद परिवार के सदस्यों में वितरित करें.
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