पितृ पक्ष में पूर्वजों की तृप्ति और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए श्राद्ध और सेवा की परंपरा रही है. ध्यान आश्रम के मार्गदर्शक अश्विनी गुरुजी ने पितृ पक्ष के दौरान गौसेवा, श्राद्ध और यज्ञ को विशेष महत्व देने की बात कही है. उन्होंने कहा कि हिंदू परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है.
अश्विनी गुरुजी के अनुसार, पितृ पक्ष के 16 दिनों में पितृलोक के द्वार खुलने और पूर्वजों को अपने परिजनों से मिलने की अनुमति मिलने की मान्यता है. उन्होंने कहा कि पूर्वजों को तृप्त करने की परंपरा भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में अलग-अलग रूपों में रही है. चीन, सिंगापुर और मलेशिया में इसे ‘हंग्री घोस्ट फेस्टिवल’, इंडोनेशिया और बाली में ‘हारी राया गलुंगन’, थाईलैंड में ‘सत थाई’ और कंबोडिया में ‘पचुम बेन’ जैसे पर्वों के रूप में मनाया जाता है. यूरोप में ‘ऑल सेंट्स डे’ और ‘ऑल सोल्स डे’ तथा सेल्टिक परंपरा में भी पूर्वजों के स्मरण से जुड़े आयोजन होते रहे हैं.
गौसेवा को बताया विशेष महत्व
अश्विनी गुरुजी ने कहा कि पितरों की तृप्ति के लिए गायों और बैलों को भोजन कराना, उनकी देखभाल करना और उनकी सेवा करना महत्वपूर्ण माना गया है. हिंदू शास्त्रों में वर्णित वैतरणी नदी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा को इस नदी को पार करना होता है. धार्मिक मान्यता है कि गाय या बैल की पूंछ पकड़कर इसे पार करना आसान होता है और गौसेवा करने वाले व्यक्ति को मृत्यु के बाद ऐसी सहायता प्राप्त होती है.
उन्होंने कहा कि पूर्वजों की सेवा और उनके प्रति कृतज्ञता की कमी को धार्मिक मान्यताओं में परिवार से जुड़ी कई परेशानियों से जोड़ा गया है. इनमें पारिवारिक कलह, आपसी विवाद, आर्थिक परेशानी और संतान से जुड़ी कठिनाइयां शामिल हैं. इसी मान्यता को ‘पितृ दोष’ कहा जाता है.
26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक यज्ञ
अश्विनी गुरुजी ने कहा कि शास्त्रों में व्यक्ति को अपने जीवनकाल में ही पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने तथा उनके ऋण को चुकाने का निर्देश दिया गया है. इसी प्रक्रिया को ‘श्राद्ध’ कहा जाता है.
ध्यान आश्रम की ओर से बताया गया है कि पितृ पक्ष के दौरान 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक यज्ञशाला में प्रतिदिन यज्ञ किए जाएंगे. आश्रम के अनुसार, पितृ यज्ञों के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए info@dhyanfoundation.com पर संपर्क किया जा सकता है.
अश्विनी गुरुजी ध्यान आश्रम के मार्गदर्शक और वैदिक विज्ञान के ज्ञाता हैं. उनकी पुस्तक ‘सनातन क्रिया: द एजलेस डायमेंशन’ का उल्लेख एंटी-एजिंग पर शोध-ग्रंथ के रूप में किया गया है.

