Johar Live Desk : विजय थलपति की आखिरी फिल्म “जन नायकन” की रिलीज़ पर आज मद्रास हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) और मेकर्स KVN प्रोडक्शंस के बीच कोर्ट में गहन बहस हुई। CBFC ने कोर्ट में कहा कि फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजने की जानकारी 6 जनवरी को प्रोड्यूसर्स को दी गई थी, और फिल्म में सुझावित 14 कट बोर्ड का शुरुआती कदम था, अंतिम फैसला नहीं। बोर्ड के चेयरपर्सन ने अभी तक फिल्म पर अभी तक किसी प्रकार का कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।
मेकर्स ने दावा किया कि उनकी फिल्म का बजट 500 करोड़ रुपए का है और रिलीज़ में देरी से उन्हें बड़ा वित्तीय नुकसान हो रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि “आप अपनी लागत का हवाला देकर राहत नहीं मांग सकते।” CBFC की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एआरएल सुंदरेशन ने यह भी बताया कि फिल्म की रिलीज़ डेट को पहले ही ऐलान करना सही नहीं था, जबकि सेंसर सर्टिफिकेट अभी जारी नहीं हुआ था। चीफ जस्टिस ने बोर्ड से यह भी पूछा कि फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेजा क्यों गया और इसकी जानकारी चेन्नई के रीजनल ऑफिस से भेजी गई थी या मुंबई से। अदालत को बताया गया कि यह मुंबई ऑफिस से भेजी गई थी।
इससे पहले मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट में हाई कोर्ट की उसी डिविजन बेंच के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें फिल्म की रिलीज़ पर अंतरिम रोक को चुनौती दी गई थी। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर हाई कोर्ट से ही निर्णय लेने के लिए कहा था। फिल्म को पहले 9 जनवरी 2026 को रिलीज़ किया जाना था, लेकिन सेंसर बोर्ड में एक शिकायत मिलने के कारण रिलीज़ पर रोक लगा दी गई। शिकायत में कहा गया कि फिल्म में कुछ सीन ऐसे हैं, जो सेना की छवि को गलत तरीके से पेश कर सकते हैं और इससे भावनाएं आहत हो सकती हैं। आज दोपहर के बाद कोर्ट KVN प्रोडक्शंस की दलील सुनेगा और इसके बाद यह तय होगा कि हाई कोर्ट फिल्म की रिलीज़ पर तुरंत फैसला सुनाएगा या अगली सुनवाई के लिए पोस्टपोन करेगा।
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