मुस्कान चौधरी
हर पीढ़ी का अपना एक क्रिकेट हीरो होता है, लेकिन कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो समय से आगे निकलकर इतिहास बन जाते हैं. सुनील गावस्कर उन्हीं नामों में शामिल हैं. जब तेज गेंदबाजों की रफ्तार बल्लेबाजों के लिए सबसे बड़ा खतरा मानी जाती थी और हेलमेट आम नहीं था, तब गावस्कर ने अपने साहस और शानदार तकनीक से पूरी दुनिया का सम्मान हासिल किया. आज ‘लिटिल मास्टर’ अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं.
सुनील गावस्कर का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुंबई में हुआ था. उनके परिवार का खेलों से गहरा जुड़ाव था. बचपन से ही क्रिकेट में रुचि रखने वाले गावस्कर 1971 में वेस्टइंडीज दौरे पर टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया. अपने पहले ही टेस्ट सीरीज में उन्होंने 774 रन बनाकर दुनिया को चौंका दिया. यह आज भी किसी बल्लेबाज द्वारा डेब्यू टेस्ट सीरीज में बनाए गए सबसे ज्यादा रनों में शामिल है. इसी प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का बड़ा सितारा बना दिया.
उनकी बैटिंग के कारनामों के अलावा, गावस्कर क्रिकेट इतिहास में एक बहुत बड़ा नाम हैं, जिसकी वजह 1970 और 80 के दशक में वेस्टइंडीज़ के महान गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ उनकी बैटिंग है. ‘लिटिल मास्टर’ का बिना हेलमेट के एंडी रॉबर्ट्स, कॉलिन क्रॉफ्ट, जोएल गार्नर, मैल्कम मार्शल और माइकल होल्डिंग जैसे तेज़ गेंदबाज़ों की तिकड़ी का सामना करना क्रिकेट की मशहूर कहानियों में से एक है.
असल में, गावस्कर का कैरेबियन खिलाड़ियों के ख़िलाफ़ अपनी छाप छोड़ना तय था. 1971 में अपने डेब्यू पर उन्होंने वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ 774 रन बनाए- जो किसी भी डेब्यू करने वाले खिलाड़ी द्वारा अब तक बनाए गए सबसे ज़्यादा रन हैं. उनका असर इतना ज़बरदस्त था कि सीरीज़ के आखिर तक गावस्कर के सम्मान में एक गाना बन गया था. कैलिप्सो-सिंगर विलार्ड हैरिस, जिन्हें ‘लॉर्ड रिलेटर’ के नाम से भी जाना जाता है, ने यह गाना बनाया था: “इट वाज़ गावस्कर. द रियल मास्टर. जस्ट लाइक अ वॉल. वी कुडंट आउट गावस्कर एट ऑल. नॉट एट ऑल.”
जब भारत इंग्लैंड के ख़िलाफ़ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ खेल रहा है, तो मुंबई रणजी टीम में उनके पूर्व साथी (1980–91) किरण मोकाशी ने टेस्ट क्रिकेट में गावस्कर की महानता को याद किया. मोकाशी ने कहा, “वह टेस्ट क्रिकेट के सच्चे दिग्गज थे, और आज के खिलाड़ियों की उनसे तुलना करना ठीक नहीं है.”
संन्यास लेने के बाद भी, उनके रिकॉर्ड और खेल पर उनके प्रभाव से कई उभरते हुए क्रिकेटरों को प्रेरणा मिलती है. उनके जन्मदिन पर, आइए उनके पांच यादगार रिकॉर्ड पर नज़र डालते हैं.
1. भारत के लिए एक टेस्ट सीरीज़ में सबसे ज़्यादा रन
1971 में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ अपनी पहली सीरीज़ में, सुनील गावस्कर ने शानदार 774 रन बनाए. यह रिकॉर्ड आज भी किसी भारतीय द्वारा एक टेस्ट सीरीज़ में बनाए गए सबसे ज़्यादा रनों का रिकॉर्ड है.
2. भारतीय कप्तान के तौर पर एक टेस्ट सीरीज़ में सबसे ज़्यादा रन
1978-79 में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ सीरीज़ में गावस्कर की कप्तानी असाधारण थी. उन्होंने 732 रन बनाए, जो किसी भी भारतीय कप्तान का टेस्ट सीरीज़ में बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर है. इससे मुश्किल से मुश्किल हालात में भी बल्लेबाज़ी में उनकी निरंतरता का पता चलता है.
3. किसी भी बल्लेबाज़ द्वारा अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ में सबसे ज़्यादा रन
सुनील गावस्कर ने 1971 में वेस्ट इंडीज़ के ख़िलाफ़ अपनी पहली सीरीज़ में 774 रन बनाकर इतिहास रच दिया. किसी भी खिलाड़ी द्वारा अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ में सबसे ज़्यादा रन बनाने का यह रिकॉर्ड आज भी अटूट है.
4. भारतीय ओपनर के तौर पर सबसे ज़्यादा टेस्ट रन
गावस्कर ने 9,607 टेस्ट रनों के साथ भारतीय ओपनर्स के लिए एक बेंचमार्क स्थापित किया. भले ही वह कुल मिलाकर दूसरे स्थान पर हैं, लेकिन भारतीय ओपनर्स में वह सबसे ज़्यादा टेस्ट रन बनाने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं.
5. भारत के लिए लगातार सबसे ज़्यादा टेस्ट मैच खेलना
1975 से 1987 तक, सुनील गावस्कर ने भारत के लिए लगातार 106 टेस्ट मैच खेले, जो आज भी एक रिकॉर्ड है. बिना किसी रुकावट के खेलने का उनका भारतीय टीम के प्रति समर्पण, खेल के प्रति उनके जुनून को दर्शाता है.
आज भले ही क्रिकेट पूरी तरह बदल चुका हो, लेकिन सुनील गावस्कर की विरासत आज भी उतनी ही मजबूत है. उनके रिकॉर्ड, अनुशासन, तकनीक और निडर बल्लेबाजी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए मिसाल हैं. ‘लिटिल मास्टर’ ने यह साबित किया कि महान खिलाड़ी सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि अपने साहस, चरित्र और खेल पर छोड़ी गई अमिट छाप से पहचाने जाते हैं. 76वें जन्मदिन पर सुनील गावस्कर का सफर सिर्फ एक महान क्रिकेटर की कहानी नहीं, बल्कि जुनून, धैर्य और आत्मविश्वास से इतिहास रचने की प्रेरणा भी है.
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