पूर्व भारतीय कप्तान और एशियाई खेलों की पदक विजेता असुंता लकड़ा ने हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह पर झारखंड में हो रही कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाने के कारण उन्हें डराने-धमकाने का आरोप लगाया है. वर्तमान में हॉकी इंडिया की चयनकर्ता तथा संगठन की कई आंतरिक समितियों की सदस्य असुंता का दावा है कि हॉकी इंडिया के महासचिव और हॉकी झारखंड के अध्यक्ष भोलानाथ सिंह ने न केवल उनके साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि उन्हें चेतावनी भी दी कि यदि उन्होंने अपनी सीमा लांघी तो उन्हें इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.
स्पोर्ट्स स्टार मैग्जीन में छपी उत्तरा गणेशन की रिपोर्ट के मुताबिक भावुक होते हुए असुंता ने कहा, “मैंने 15 वर्षों तक भारत के लिए हॉकी खेली है, राष्ट्रीय टीम की कप्तानी की है, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कोच के रूप में काम किया है और चयन समिति की सदस्य भी हूं. अगर मैं खेल में आने वाली युवा लड़कियों के लिए आवाज़ नहीं उठाऊंगी तो फिर इसका क्या मतलब है? लेकिन जब भी मुझे कुछ गलत दिखाई देता है और मैं उसके खिलाफ बोलती हूं, तो समस्या का समाधान करने के बजाय मुझे धमकाया जाता है.”
असुंता ने आरोप लगाया कि यह विवाद महिला खिलाड़ियों के कथित यौन शोषण के मामले में कोच सुधीर गोल्ला के खिलाफ उनकी शिकायत के बाद शुरू हुआ. उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, “दो महीने पहले मेरे पिता का गंभीर एक्सीडेंट हुआ था और उनकी तबीयत अब भी ठीक नहीं है. बीते 9 मई को मुझे भोलानाथ सिंह का फोन आया. उन्होंने मुझसे कहा, ‘अपनी औकात में रहो, औकात में रहकर बात करो. वरना हमें आता है औकात बताना. ‘सच कहूं तो उनकी धमकियों से मैं बुरी तरह घबरा गई थी. परिवार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मैं बेहद परेशान हूं और इस बात से डरी हुई हूं कि आगे क्या हो सकता है.”
पूर्व मिडफील्डर असुंता ने यह भी आरोप लगाया कि भोलानाथ सिंह ने उनसे कहा कि उन्हें हॉकी झारखंड, हॉकी इंडिया या यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय हॉकी महासंघ (FIH) से भी कोई नहीं हटा सकता और न ही कोई उन्हें चुनौती दे सकता है. उल्लेखनीय है कि हॉकी इंडिया का वार्षिक जूनियर प्लेयर ऑफ द ईयर पुरस्कार भी असुंता लकड़ा के नाम पर दिया जाता है.
असुंता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य खेल विभाग द्वारा शिकायतों के बाद कोच पद से हटाए गए सुधीर गोल्ला अब भी हॉकी झारखंड कार्यालय में आते-जाते हैं और दावा करते हैं कि उन्हें निलंबन का कोई पत्र नहीं मिला है.
उन्होंने कहा, “हॉकी झारखंड के अधिकारी लगातार मुझे बदनाम करने और धमकाने की कोशिश कर रहे हैं. यह घटना हॉकी इंडिया लीग (HIL) के दौरान हुई थी, लेकिन संबंधित लड़की को मेरे खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रभावित किया गया. गोल्ला, जो झारखंड के भी नहीं हैं, महासचिव के घर पर रह रहे हैं और सभी को यह कहते हुए धमका रहे हैं कि उन्हें कहीं नहीं जाना है.”
असुंता ने बताया कि उन्होंने इस मामले की शिकायत राज्य के खेल मंत्री सुदिव्य कुमार से भी की है और 29 जून को मुख्यमंत्री कार्यालय में भी लिखित शिकायत सौंपी है.
उन्होंने कहा, “सुमराय टेटे, सावित्री पूर्ति और कांती बा सहित 30 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों ने मेरे समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं. इसकी एक प्रति स्पोर्टस्टार के पास भी है.”
हालांकि, भोलानाथ सिंह ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, “ऐसी कोई घटना नहीं हुई है. मुझे नहीं पता कि वह ऐसा क्यों कह रही हैं. मैं इन सभी आरोपों का पूरी तरह से खंडन करता हूं.”
वहीं, हॉकी इंडिया की उपाध्यक्ष असीमा अली ने असुंता के आरोपों का समर्थन किया और कहा कि उन्होंने पिछली कार्यकारी बोर्ड (Executive Board) की बैठक में इस मुद्दे पर भोलानाथ सिंह से सवाल किया था.
असीमा ने कहा, “इस तरह की कई शिकायतें आई हैं, लेकिन भोलानाथ सिंह ने कार्यकारी बोर्ड को इनमें से किसी भी शिकायत की जानकारी नहीं दी. उन्होंने एक आंतरिक समिति बनाई है, जिसमें योग्य लोगों के बजाय अपने समर्थकों को शामिल किया गया है. जब मैंने असुंता को दी गई धमकियों के बारे में उनसे सवाल किया, तो उन्होंने मुझ पर भी चिल्लाया और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया.”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इस पूरे मामले को लेकर खेल सचिव को पहले ही पत्र लिख चुकी हूं. सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए क्योंकि अब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है. पहले राष्ट्रीय कोचों के खिलाफ शिकायतें आईं, फिर हॉकी इंडिया के अधिकारी विक्रम सिंह, सुधीर गोल्ला और अब यह मामला सामने आया है. अगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो मैं अगला कदम कानूनी कार्रवाई के रूप में उठाऊंगी.”
कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के वक्त सेक्स, ड्रग्स और धमकी
पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार शैलेष चतुर्वेदी लिखते हैं, …और अब हॉकी में एक और मामला आ गया है. इस बार सेक्स और धमकी दोनों के आरोप हैं. मामला झारखंड का है, जहां एक कोच पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का आरोप था. कोच को ड्यूटी से हटा दिया गया था. लेकिन आरोप यही है कि वह कोच अब भी लगातार झारखंड हॉकी के ऑफिस में बैठता है.
वो आगे लिखते हैं, आरोप लगाने वाली असुंता लाकड़ा हैं, जो महिला हॉकी की बड़ी खिलाड़ी हैं और हॉकी इंडिया के तमाम पदों पर रह चुकी हैं, कुछ पर अब भी हैं. आरोप इससे आगे भी है. उनका आरोप है कि हॉकी इंडिया के महासचिव भोलानाथ सिंह उन्हें धमका रहे हैं कि औकात में रहो.
भारतीय हॉकी इस वक्त सेक्स और ड्रग्स के बीच है. कई आरोप हैं, लेकिन ज्यादातर में ऐसा एक्शन लेने के बजाय कि नजीर बन जाए, इसे ढकने-दबाने-छुपाने की ही कोशिश हो रही है. इससे पहले हॉकी इंडिया के एक कर्मचारी पर सेक्सुअल हैरेसमेंट का चार्ज लगा था. नतीजा – अभी तक कोई एक्शन नहीं. वह शख्स अब भी हॉकी इंडिया का ही कर्मचारी है.
महिला हॉकी में सीनियर और जूनियर कोच पर भी आरोप लगा था. हालांकि सीनियर कोच पर आरोप भले ही पॉश के अंडर आता हो, लेकिन मामला ‘रूड बिहेवियर’ पर प्लेयर्स के एक साथ हो जाने का ज्यादा था. जूनियर कोच पर सीरियस चार्जेज थे, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया या हट जाने दिया गया.
इसका अलावा, कई खिलाड़ियों पर भी ऐसे आरोप हैं, जिनमें कॉलगर्ल बुलाने जैसा मामला भी है. इन पर कोई एक्शन नहीं हुआ है. मामला ड्रग्स का भी था, जिसे लेकर हॉकी इंडिया अध्यक्ष ने एक्शन लेने की बात कही थी. लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं हुआ है. बल्कि जिन पर आरोप थे, वे टीम इंडिया का हिस्सा हैं.
ये सब चल रहा है, जब भारत कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए तैयार हो रहा है. याद कीजिए, 2010 के गेम्स शानदार हुए थे. लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों ने क्या हालत कर दी थी. इस समय मामला खिलाड़ियों और अधिकारियों को अनुशासित करने का है. यहां तो फेडरेशन अपने कर्मचारी तक पर एक्शन नहीं ले पा रही है.
झारखंड मामले में राज्य सरकार से शिकायत की गई है. लेकिन जरूरी है कि केंद्र सरकार की तरफ से दखल दिया जाए. हॉकी में भारत ने लगातार दो ओलिंपिक ब्रॉन्ज जीते हैं. यह मोमेंटम बने रहने के लिए अनुशासन सबसे बड़ी जरूरत है, जिसकी कमी पूरे फेडरेशन में नजर आ रही है.

