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    Home»जोहार ब्रेकिंग»सिस्टम फेल, मासूम ढ़ेर : कोल्हान में कैसे हो रहा ब्रेन मलेरिया ब्लास्ट?
    जोहार ब्रेकिंग

    सिस्टम फेल, मासूम ढ़ेर : कोल्हान में कैसे हो रहा ब्रेन मलेरिया ब्लास्ट?

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkJuly 10, 2026No Comments5 Mins Read1
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    मलेरिया
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    जमशेदपुर के पोटका प्रखंड के कंदर गांव में आज-कल जब सूरज ढल रहा होता है, तो हवा में एक अजीब सी खामोशी तैरने लगती है. यह खामोशी उन पांच मासूम बच्चों की कराह महसूस करा जाती है, जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में तेज बुखार की तपिश में दम तोड़ दिया. पांच बच्चों समेत सात लोगों की जान गई थी. घर के आंगन में सन्नाटा और अपनों को खोने का गम पसरा हुआ है. लेकिन यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है, बल्कि पूरे कोल्हान क्षेत्र की है. इन दिनों यहां एक अदृश्य दुश्मन ने लोगों की रातों की नींद उड़ा रखी है. जमशेदपुर और इसके आसपास के इलाकों में मलेरिया का यह नया रूप किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं है.

    स्वास्थ्य विभाग की टीम जब गांवों में जांच के लिए निकली, तो आंकड़े देखकर खुद डॉक्टर भी हैरान रह गये. महज एक दिन की जांच में 101 नए चेहरे इस बीमारी की चपेट में मिले. इसके बाद से पूरे जिले में हड़कंप मच गया. इस बार संक्रमण का केंद्र भी चुपके से बदल गया. कल तक जहां पोटका इस दर्द को सबसे ज्यादा झेल रहा था, वहीं अब पटमदा इस रेस में आगे निकल गया है. नए आंकड़ों के मुताबिक पटमदा में एक ही दिन में सबसे ज्यादा 21 नए मरीज सामने आए हैं.

    दूसरी तरफ पोटका में 19 लोग बिस्तर पर पड़ गए हैं. इसके अलावा डुमरिया में 18, जबकि घाटशिला और मुसाबनी जैसे शांत इलाकों से भी 16-16 मरीजों के मिलने की खबरें आईं, तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. इसके साथ ही धालभूमगढ़ और सदर अस्पताल में भी पांच-पांच मरीज मिले हैं, जबकि बहरागोड़ा में एक नया मामला सामने आया है. राहत की सांस सिर्फ चाकुलिया, जुगसलाई, मानगो और बिरसानगर जैसे चंद इलाकों ने ली, जहां फिलहाल सन्नाटा है.

    यह सामान्य मलेरिया नहीं है, बल्कि डॉक्टरों की भाषा में कहें तो ‘ब्रेन मलेरिया’ यानी प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम का हमला है. यह वो परजीवी है जो सीधे दिमाग की नसों को जकड़ लेता है, जिससे इंसान देखते ही देखते कोमा में चला जाता है.

    अब तक जिले में 63,570 लोगों की जांच हो चुकी है और करीब 1,603 लोग इसकी चपेट में हैं. डराने वाली बात यह है कि इनमें से 1,268 लोग इसी खतरनाक ब्रेन मलेरिया से जूझ रहे हैं, जबकि 295 लोगों को सामान्य मलेरिया और 40 मरीजों में दोनों का मिक्स इन्फेक्शन मिला है. हाल ही में आए 101 नए मामलों में भी 67 मरीज ब्रेन मलेरिया के हैं.  इस खतरनाक मलेरिया की वजह से अब तक सात लोगों की जान भी जा चुकी है, जिनमें से पांच मासूम बच्चे अकेले पोटका इलाके के थे.

    कोल्हान के इन जंगलों और पहाड़ों के बीच यह बीमारी नई नहीं है. इससे पहले हमारे सुरक्षा बल ‘झारखंड जगुआर’ (STF) के जांबाज जवान भी इन घने जंगलों में एंटी-नक्सल ऑपरेशन के दौरान इस अदृश्य दुश्मन से लड़ते हुए शहीद हो चुके हैं. पिछले 13-14 वर्षों में करीब 83 से अधिक जवान केवल ब्रेन मलेरिया और इसके गंभीर संक्रमण के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं.

    जब सिस्टम सोया तो मासूमों ने गंवाई जान, अब जागी सरकार

    जब पोटका के पांच बच्चों की मौत की गूंज रांची तक पहुंची, तो स्वास्थ्य विभाग ने इस तबाही की वजह टटोलने के लिए एक अंदरूनी जांच बैठाई. जो सच सामने आया, उसने सबको सन्न कर दिया. जिस वक्त गांवों में मच्छरों का लार्वा पनप रहा था, तब कागजों पर फॉगिंग हो रही थी. वहां न समय पर जांच हुई और न ही दवाइयां बंटीं, बल्कि निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से ठप थी. इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विभाग ने तुरंत कार्रवाई की और पोटका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रजनी महाकुड को सस्पेंड कर दिया. उनकी जगह अब डॉ. सुकांत सीट को नया प्रभारी बनाया गया है ताकि हालात को संभाला जा सके.

    अब स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के निर्देश पर आला अधिकारी खुद जमीन पर उतर आए हैं. ‘सहिया’ दीदियां और स्वास्थ्य कर्मी हाथों में रैपिड टेस्ट किट थामे उबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए उन सुदूर आदिवासी गांवों तक पहुंच रहे हैं, जहां कभी डॉक्टर की गाड़ी नहीं पहुंचती थी. पिछले कुछ दिनों में 11,090 लोगों के खून के सैंपल लिए जा चुके हैं, जिनमें से ज्यादातर जांच रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट के जरिए मौके पर ही की गई. स्वास्थ्य कर्मी अब तक 17 गांवों में विशेष कैंप लगा चुके हैं और 8 गांवों में फॉगिंग तथा कीटनाशकों के छिड़काव का काम पूरा किया गया है. जमशेदपुर के सदर अस्पताल और एमजीएम मेडिकल कॉलेज से अतिरिक्त बाल रोग विशेषज्ञों और डॉक्टरों की टीमें प्रभावित ब्लॉकों में कैंप कर रही हैं.

    अगर पूरे राज्य के आंकड़ों पर नजर डालें तो झारखंड में ब्रेन मलेरिया मुख्य रूप से पहाड़ी और घने जंगलों वाले इलाकों में अपना असर दिखाता है. यहां मानसून की शुरुआत यानी जून से अक्टूबर के दौरान इसका प्रकोप सबसे ज्यादा होता है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के मई-जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के 6 जिले मलेरिया के सबसे बड़े हॉटस्पॉट बने हुए हैं. इसमें चाईबासा सबसे ऊपर और बेहद संवेदनशील रहा, जहां अकेले मई 2026 तक 4,891 मामले दर्ज किए जा चुके थे. इसके अलावा जमशेदपुर, खूंटी, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज के विशेषकर पहाड़िया जनजाति वाले इलाके इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

    वर्तमान हालात को देखते हुए सरकार अब पूरे राज्य में युद्ध स्तर पर मास फीवर सर्वे और लार्वा नियंत्रण अभियान चला रही है ताकि इस जानलेवा बीमारी को आगे फैलने से रोका जा सके.

    Also Read : डीजीपी तदाशा मिश्र ने की आलाधिकारियों संग बड़ी बैठक, अगले एक हफ्ते में फिर शुरु होगा बड़ा नक्सल अभियान

    Innocent Lives Lost: How is a 'Brain Malaria' Outbreak Unfolding in Kolhan? System failure मासूम ढ़ेर : कोल्हान में कैसे हो रहा ब्रेन मलेरिया ब्लास्ट? सिस्टम फेल
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