Ranchi / Chaibasa : झारखंड के चाईबासा के अलावा सटे जिले को मिलाकर एक बार फिर से नक्सलियों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया जायेगा। डीजीपी तदाशा मिश्र की अध्यक्षता नक्सल अभियान को लेकर समाहरणालय भवन में पुलिस अधिकारियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई है। इसका मुख्य फोकस सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों की मौजूदा स्थिति और पूरे क्षेत्र को नक्सलियों से मुक्त कराने को लेकर नई रणनीति तैयार हुई है। बैठक में तय किया गया कि अगले एक हफ्ते के अंदर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बल एक बार फिर समन्वित तरीके से बड़े स्तर पर नक्सल विरोधी अभियान शुरू करेंगे। चाईबासा में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक को आने वाले महीनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में आईजी सीआरपीएफ साकेत कुमार सिंह, नक्सल अभियान सह प्रवक्ता नरेंद्र कुमार सिंह, आईजी झारखंड जगुआर अनुप बिरथरे, डीआईजी कोल्हान अनुरंजन किस्पोट्टा, चाईबासा एसपी अमित रेणु, सरायकेला-खरसावां एसपी मनोज स्वर्गियारी समेत डीएसपी स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद थे।
बैठक में डीजीपी ने साफ कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके लिए सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, खुफिया सूचनाओं का प्रभावी आदान-प्रदान और आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के दौरान किसी भी स्तर पर समन्वय की कमी नहीं होनी चाहिए।
समीक्षा बैठक में हाल के महीनों में चलाए गए अभियानों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि लगातार कार्रवाई के कारण कई इलाकों में नक्सलियों की गतिविधियां कमजोर हुई हैं। बड़ी संख्या में नक्सली संगठन छोड़कर मुख्यधारा में लौटे हैं, जबकि कई ठिकानों को ध्वस्त किया गया है। इसके बावजूद सारंडा के दुर्गम जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में अभी भी कुछ नक्सली समूह छिटपुट में सक्रिय हैं, जिनके खिलाफ अभियान को और तेज करने की जरूरत है।
डीजीपी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के साथ-साथ आम लोगों का विश्वास जीतना भी उतना ही जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने, स्थानीय लोगों से संवाद मजबूत करने और विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करने पर भी जोर दिया गया। उनका कहना था कि सुरक्षा और विकास दोनों साथ-साथ चलेंगे, तभी नक्सलवाद पर स्थायी रूप से अंकुश लगाया जा सकेगा।
बैठक में सुरक्षा बलों की परिचालन रणनीति, सड़क सुरक्षा, बारूदी सुरंगों से निपटने की तैयारी, संचार व्यवस्था और जवानों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि अभियान शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि कार्रवाई प्रभावी और सुरक्षित तरीके से संचालित की जा सके।
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