पवन, रांची
झारखंड की सियासत में इन दिनों एक ऐसा ‘पॉलिटिकल ट्विस्ट’ आया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. निवेश और रोजगार के मुद्दे पर जहां एक तरफ झारखंड बीजेपी सीएम हेमंत सोरेन को घेरने के लिए ‘तलवार’ खींचे खड़ी थी, वहीं दूसरी तरफ पार्टी के अपने ही सांसद ने सीएम की पीठ थपथपा कर अपनी ही पार्टी के हाथों से ‘तलवार’ छीन ली. बीजेपी पूछ रही थी कि राज्य में निवेश और नौकरियां कहां हैं, और कुरुक्षेत्र से उसके अपने लोकसभा सांसद और देश के दिग्गज उद्योगपति नवीन जिंदल ने झारखंड में 70 हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का ऐलान कर दिया.
पूरा माजरा दिल्ली के आलीशान होटल ताज में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन समिट का है. सीएम हेमंत सोरेन की मौजूदगी में झारखंड सरकार और देश के नामी-गिरामी जिंदल ग्रुप के बीच एक ऐतिहासिक एमओयू हुआ. हालांकि, नवीन जिंदल उस वक्त देश में नहीं थे, लेकिन उन्होंने विदेश से ही एक विशेष वीडियो मैसेज जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन, उद्योग मंत्री संजय प्रसाद यादव और राज्य के आला अफसरों को धन्यवाद देते हुए झारखंड सरकार के सकारात्मक रुख की जमकर तारीफ की. अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि बीजेपी ने हेमंत सोरेन से जो तीखे सवाल पूछे थे, उसका सबसे करारा जवाब खुद उनकी ही पार्टी के सांसद ने इतना बड़ा इंवेस्टमेंट करके दे दिया है.
एक ओर जहां दिल्ली में समिट चल रहा था, MoU पर दस्तखत किये जा रहे थे, वहीं, दूसरी ओर झारखंड बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता संदीप वर्मा ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस दिल्ली बैठक को महज एक नाटक और छलावा करार दिया था. उन्होंने एक बड़ा सियासी सवाल दागते हुए कहा था कि जब राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर खुद दिल्ली में ही मौजूद थे, तो वे इस महत्वपूर्ण बैठक से गायब क्यों रहे. बीजेपी का आरोप था कि सरकार इस निवेश को लेकर गंभीर नहीं है और सिर्फ जनता को गुमराह करने के लिए बड़े होटलों में बैठकें कर रही है. संदीप वर्मा ने सीएम के पिछले साल हुए स्वीडन, स्पेन, स्विट्जरलैंड और ब्रिटेन के दौरों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी और पूछा था कि जनता की गाढ़ी कमाई उड़ाकर राज्य को आखिर जमीनी स्तर पर क्या हासिल हुआ. बीजेपी का दावा था कि राज्य में बढ़ती रंगदारी, अपराध और भ्रष्टाचार के चलते निवेशक यहां आने से डर रहे हैं.
लेकिन बीजेपी के इन तमाम दावों और आरोपों की हवा खुद उनकी ही पार्टी के सांसद नवीन जिंदल के आंकड़ों ने निकाल दी. वीडियो संदेश में नवीन जिंदल ने साफ कहा कि वे झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों और यहां के मेहनती लोगों पर पूरा भरोसा करते हैं. उन्होंने निवेश का पूरा ब्लूप्रिंट सामने रखते हुए बताया कि जिंदल ग्रुप स्टील सेक्टर में करीब 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश करेगा, जिससे राज्य के 10 हजार युवाओं को सीधे तौर पर अलग-अलग सेक्टर में रोजगार मिलेगा. इसके अलावा, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए परमाणु ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, ताकि नए उद्योगों और डेटा सेंटर्स को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के साफ-सुथरी बिजली मिल सके.
जिंदल का दावा- 21 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार
जिंदल ने दावा किया कि 70 हजार करोड़ के इस मेगा प्रोजेक्ट से कंस्ट्रक्शन, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में कुल मिलाकर 21 हजार युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे. नवीन जिंदल ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में झारखंड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है.
अब स्थिति यह बन गई है कि एक तरफ झारखंड बीजेपी राज्य की खराब कानून-व्यवस्था का हवाला दे रही है, और दूसरी तरफ उन्हीं के सांसद झारखंड के माहौल को पूरी तरह सुरक्षित और बेहतर मानकर इतना बड़ा दाव खेल रहे हैं. अब हर किसी की नजर इस बात पर है कि झारखंड बीजेपी अपने ही सांसद के इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर क्या सफाई देती है.
जिंदल समूह का झारखंड में वर्तमान सेटअप रामगढ़ जिले के पतरातू में है, जहां कंपनी 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कर चुकी है. यहां लगाये गये हाईटेक मिलों की सालाना उत्पादन क्षमता 1.6 MTPA यानी मिलियन टन है. देश के निर्माण क्षेत्र में सबसे भरोसेमंद माने जाने वाले ‘जिंदल पैंथर टीएमटी सरिया’ का एक बड़ा हिस्सा इसी पतरातू मिल में तैयार होता है. इसके अलावा, यहां की वायर रॉड मिल से हर साल लाखों टन हाई क्वालिटी वाले वायर रॉड्स बनाए जाते हैं, जो देश के बड़े-बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होते हैं.
जिंदल ग्रुप ने कोल लिंकेज, रेलवे साइडिंग और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया है. व्यापार के साथ-साथ जिंदल समूह CSR यानी सामाजिक जिम्मेदारी के तहत स्थानीय स्तर पर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक्टिव है. हाल ही में सीएम हेमंत सोरेन और नवीन जिंदल के बीच हुई चर्चा के अनुसार, कंपनी युवाओं के कौशल विकास और आदिवासी व पिछड़े वर्ग के छात्रों को स्कॉलरशिप देने पर काम कर रही है. अब 70,000 करोड़ रुपये का नया इंवेस्टमेंट पतरातू को एक विशाल ‘इंटीग्रेटेड स्टील हब’ बनाएगा.
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