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    Home»ट्रेंडिंग»विश्व सर्प दिवसः झारखंड में 50 तरह के सांप, चार साल में स्नेकबाइट के 9438 मामले
    ट्रेंडिंग

    विश्व सर्प दिवसः झारखंड में 50 तरह के सांप, चार साल में स्नेकबाइट के 9438 मामले

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharyJuly 16, 2026Updated:July 17, 2026No Comments6 Mins Read12
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    World Snake day
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    मुस्कान चौधरी 

    बारिश की एक रात, घर के आंगन में खेल रहे बच्चे के पास अचानक सांप निकल आता है. खेत में काम कर रहा किसान घास के बीच पैर रखते ही सांप के डसने का शिकार हो जाता है. ऐसे ही कई हादसे हर मानसून में झारखंड के गांवों और शहरों से सामने आते हैं. डर और घबराहट में कई लोग पहले झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं, जबकि डॉक्टर कहते हैं कि समय पर अस्पताल पहुंच जाएं तो ज्यादातर मरीजों की जान बचाई जा सकती है. झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में हजारों लोग सांप के काटने का शिकार हुए हैं और कई लोगों की मौत भी हुई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि साल में एक दिन ऐसा भी है, जो खासतौर पर सांपों के लिए समर्पित है. जी हां, हर साल 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस यानी वर्ल्ड स्नेक डे मनाया जाता है. लेकिन आखिर इन दिन को क्यों मनाया जाता है और क्या है इसका मकसद, आइए जानते हैं-

    वर्ल्ड स्नेक डे का इतिहास

    हर साल 16 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व सांप दिवस यानी वर्ल्ड स्नेक डे मनाया जाता है. इस दिन को मनाने की शुरुआत सबसे पहले साल 1970 हुई है. दरअसल, ऐसा माना जाता है कि साल 1967 में टेक्सास में सांपो के लिए एक फर्म की शुरुआत हुई, जो धीरे-धीरे 1970 तक काफी मशहूर हो गई. इस फर्म ने लोगों को सांपो के प्रति जागरूक करने का भी काम किया. इस दौरान फर्म ने ही 16 जुलाई को सांपों को लेकर विशेष आयोजन किए, जिसे देख बाद में अन्य एनजीओ ने भी सांपों के बारे जागरूकता फैलानी शुरू कर दी और इस तरह इस दिन की शुरुआत हुई.

    भारत में हर साल हजारों लोगों की जाती है जान

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार, IDSP-IHIP के तहत दर्ज आंकड़ों में वर्ष 2025 में सांप के काटने से 431, वर्ष 2024 में 370 और वर्ष 2023 में 183 मौतें दर्ज की गईं. हालांकि, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का अनुमान है कि भारत में हर साल 30 से 40 लाख स्नेकबाइट के मामले सामने आते हैं और करीब 50,000 लोगों की मौत होती है. सरकार का कहना है कि कई मामले अस्पतालों तक पहुंच ही नहीं पाते, इसलिए वास्तविक आंकड़े सरकारी रिकॉर्ड से कहीं अधिक हो सकते हैं.

    झारखंड में स्नेकबाइट के चार साल के आंकड़े

    द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में सांप के काटने की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. राज्य स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से अप्रैल 2026 तक स्नेकबाइट के 9,438 मामले सामने आए हैं. वर्ष 2022 में 392 मामले दर्ज किए गए थे, जो 2023 में बढ़कर 1,647 हो गए. इस दौरान 2023 में 15 लोगों की मौत हुई. वर्ष 2024 में 2,760 मामले दर्ज हुए और 22 लोगों ने जान गंवाई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 4,078 मामलों तक पहुंच गया और 26 लोगों की मौत हुई. अप्रैल 2026 तक राज्य में 561 स्नेकबाइट के मामले दर्ज किए जा चुके हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों को स्नेकबाइट के इलाज में केंद्र सरकार की आधिकारिक गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं.

    दुनिया, भारत और झारखंड में कितने तरह के सांप?

    दुनिया में सांपों की करीब 3,900 प्रजातियां पाई जाती हैं. भारत में 300 से अधिक प्रजातियां हैं, लेकिन इनमें लगभग 60 ही विषैली मानी जाती हैं. अच्छी बात यह है कि अधिकांश सांप इंसानों के लिए खतरनाक नहीं होते. झारखंड की बात करें तो यहां करीब 40 से 50 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं. इनमें नाग (इंडियन कोबरा), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल वाइपर और कुछ वन क्षेत्रों में मिलने वाला बांस पिट वाइपर प्रमुख विषैले सांप हैं. वहीं धामिन (रैट स्नेक), ग्रीन वाइन स्नेक, वुल्फ स्नेक, कुकरी स्नेक समेत कई अन्य प्रजातियां विषहीन हैं. वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक राज्य में मिलने वाले अधिकांश सांप इंसानों के लिए नुकसानदेह नहीं होते और पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

    पर्यावरण के लिए क्यों जरूरी हैं सांप?

    सांप केवल जंगलों की ही नहीं, बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. ये प्राकृतिक कीट नियंत्रक के रूप में काम करते हैं और चूहों व अन्य छोटे जीवों की संख्या को नियंत्रित रखते हैं, जिससे फसलों का नुकसान कम होता है और कई बीमारियों के फैलने का खतरा भी घटता है. इसके अलावा सांप खाद्य श्रृंखला का अहम हिस्सा हैं. वे खुद भी बाज, उल्लू, नेवला और अन्य वन्यजीवों का भोजन बनते हैं, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है. इतना ही नहीं, सांप के जहर का उपयोग एंटी-वेनम और कई जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण में भी किया जाता है. इसलिए विशेषज्ञ सांपों को मारने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाने और उन्हें बचाने की सलाह देते हैं.

    कैसे पहचानें कि सांप विषैला है या नहीं?

    ग्रामीण क्षेत्रों में या रात के समय यदि सांप काट ले तो काटे गए स्थान पर दांतों के निशान देखकर शुरुआती अंदाजा लगाया जा सकता है. अगर कई छोटे-छोटे दांतों के निशान हों तो वह सामान्यतः विषहीन सांप हो सकता है. वहीं छोटे निशानों के बीच दो गहरे दांतों के निशान दिखाई दें तो वह विषैले सांप का संकेत हो सकता है. काटे वाली जगह पर तेज दर्द, जलन, लालिमा या फफोले पड़ना भी विषैले सांप के लक्षण माने जाते हैं.

    सांप की आंखें यदि लंबवत या इलिप्स आकार की हों और सिर चौड़ा व त्रिकोणीय दिखे तो उसके विषैला होने की संभावना मानी जाती है. वहीं गोल आंखें और अपेक्षाकृत गोल सिर वाले कई सांप विषहीन होते हैं. हालांकि विशेषज्ञ केवल इन लक्षणों के आधार पर अंतिम पहचान करने की सलाह नहीं देते.

    यदि सुरक्षित हो और सांप मर चुका हो तो उसे अस्पताल ले जाया जा सकता है, ताकि डॉक्टर को प्रजाति पहचानने में मदद मिले. लेकिन सांप पकड़ने या मारने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए.

    सांप काटने पर क्या करें?

    यदि टाइट कपड़े पहने हैं तो उन्हें ढीला कर दें. जिस हिस्से में सांप ने काटा है उसे हृदय की ऊंचाई से नीचे रखें. काटे हुए स्थान पर रस्सी या कपड़ा कसकर बिल्कुल न बांधें. घायल व्यक्ति को शांत रखें और उसे भरोसा दिलाएं कि समय पर इलाज से वह ठीक हो सकता है. उसे बेवजह चलने-फिरने न दें और जितनी जल्दी हो सके अस्पताल पहुंचाएं.

    डॉक्टरों के अनुसार चार घंटे के भीतर एंटी स्नेक वेनम का इंजेक्शन लगवाना बेहद जरूरी होता है. फिल्मों की तरह जहर चूसने, घाव पर चीरा लगाने या कोई घरेलू नुस्खा अपनाने की गलती न करें. मरीज को चाय, कॉफी, शराब या बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द की दवा न दें. काटे हुए स्थान पर गर्म या ठंडी सिकाई और कोई क्रीम भी न लगाएं. हल्की पट्टी बांधकर उस हिस्से को स्प्लिंट की मदद से स्थिर रखें ताकि उसका मूवमेंट कम से कम हो.

     

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