पश्चिम बंगाल में फर्जी SC/ST सर्टिफिकेट बनवाकर सरकारी योजनाओं का फायदा उठाने वालों की अब खैर नहीं है. राज्य के जनजातीय विकास मंत्री क्षुदिराम टुडू ने कहा है कि ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए पूरे राज्य में युद्धस्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ सिर्फ असली हकदारों तक ही पहुंचे.
मंत्री के अनुसार राज्य के सभी जिलों, ब्लॉकों और उपमंडलों में लगातार जांच हो रही है. विभाग महीने में दो बार प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर रहा है. जहां भी फर्जी प्रमाणपत्र मिलने की आशंका होती है, वहां तुरंत जांच शुरू कर दी जाती है. जांच में दोषी पाए जाने वालों के प्रमाणपत्र रद्द किए जाएंगे और उनसे सरकारी सुविधाएं भी वापस ली जा सकती हैं.
क्षुदिराम टुडू ने आगे कहा कि सिर्फ फर्जी लाभार्थियों पर ही नहीं, बल्कि ऐसे प्रमाणपत्र जारी कराने में किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी. सरकार पूरे मामले की तह तक जाना चाहती है ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो.
‘डुआरे सरकार‘ के दौरान गड़बड़ी का आरोप
मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के ‘डुआरे सरकार‘ अभियान के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी SC/ST प्रमाणपत्र जारी किए गए. उन्होंने कहा कि विभाग की जिम्मेदारी संभालने के बाद इस पूरे मामले की जांच उनकी पहली प्राथमिकताओं में शामिल है. हालांकि, यह आरोप मंत्री का है और इस पर टीएमसी की ओर से इस रिपोर्ट में कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
टुडू ने कहा कि जांच के दौरान कुछ ऐसे उपनामों वाले मामलों की भी विशेष जांच की जा रही है, जो अलग-अलग समुदायों में इस्तेमाल होते हैं. उनका कहना है कि सिर्फ उपनाम के आधार पर किसी को अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र नहीं दिया जा सकता, इसलिए हर आवेदन का पूरी तरह सत्यापन किया जा रहा है.
मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि SC/ST के लिए बनाई गई योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों को मिले. इसी वजह से फर्जी प्रमाणपत्रों के खिलाफ यह अभियान तेजी से चलाया जा रहा है. सरकार का दावा है कि जांच पूरी होने के बाद फर्जी लाभार्थियों को सूची से हटाया जाएगा और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
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