Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने मरीजों के हित में एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राज्य के किसी भी सरकारी या निजी अस्पताल में अब ब्लड देने के बदले ब्लड (रिप्लेसमेंट डोनेशन) नहीं मांगा जा सकता। कोर्ट के अनुसार यह प्रथा नेशनल ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल की गाइडलाइंस और नेशनल ब्लड पॉलिसी के खिलाफ है।
यह फैसला रांची की सामाजिक संस्था लाइव सेवर्स के संस्थापक अतुल गेरा द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद आया है। याचिका में कहा गया था कि कई अस्पताल इलाज के लिए ब्लड देने से पहले मरीज के परिजनों से उतना ही ब्लड डोनेट करने की शर्त रखते हैं, जो पूरी तरह गलत और अमानवीय है।
मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस एस चंद्रशेखर और जस्टिस नवनीत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि रिप्लेसमेंट डोनेशन से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। जल्दबाजी में किए गए रक्तदान से ब्लड की सही जांच नहीं हो पाती, जिससे हेपेटाइटिस और एचआईवी जैसे संक्रमण फैल सकते हैं। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि ब्लड की जरूरत को पूरा करने के लिए सरकारी और निजी अस्पताल नियमित रूप से ब्लड डोनेशन कैंप लगाएं। साथ ही राज्य सरकार को इस प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने और इसका सख्ती से पालन कराने को कहा गया है।
लाइव सेवर्स संस्था ने इस फैसले का स्वागत किया है। संस्था के संस्थापक अतुल गेरा ने कहा कि यह निर्णय मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत है और इससे जरूरतमंद लोगों को ब्लड के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
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