झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलन और जेपीएससी – जेएसससी की नियुक्तियों को लेकर हेमंत सरकार पर जमकर निशाना साधा. मोरहाबादी स्थित अपने आवास पर शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों के साथ धोखा किया है और नियुक्ति प्रक्रियाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की CBI जांच से बचने की कोशिश की जा रही है.
चंपाई सोरेन ने कहा कि झारखंड अलग राज्य बनने के बाद छात्रों का यह सबसे बड़ा आंदोलन था. छात्रों ने पूरे आंदोलन के दौरान अनुशासन बनाए रखा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी. उनकी मांग सिर्फ इतनी थी कि जेपीएससी – जेएसससी समेत भर्ती परीक्षाओं में जहां भी गड़बड़ी हुई है, उसकी CBI जांच कराई जाए.
उन्होंने कहा, “सरकार ने चालाकी का खेल खेला. रद्द करने की घोषणा कर छात्रों के आंदोलन को दो महीने के लिए स्थगित कराया गया, लेकिन इसके बाद उस फैसले पर ही रोक लग गई.”
JPSC में गड़बड़ी हुई तो इस्तीफे क्यों करवाए गए?
पूर्व मुख्यमंत्री ने JPSC से जुड़े मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि संस्था के पदाधिकारियों के इस्तीफे पहले ही करवा दिए गए. उनके मुताबिक, जिन लोगों पर गड़बड़ी के आरोप लगे, उनके खिलाफ कार्रवाई हुई और कई लोग जेल भी गए.
चंपाई सोरेन ने सवाल उठाया कि अगर मामले की जांच आगे होनी है तो संस्था के अधिकारियों के इस्तीफे करवाकर JPSC को खाली क्यों कर दिया गया. उन्होंने कहा कि इससे गड़बड़ी से जुड़े दस्तावेज और तथ्यों को सामने लाने की प्रक्रिया कमजोर हो सकती है.
चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया कि सरकार ने रद्द करने की घोषणा करके यह दिखाने की कोशिश की कि उसने छात्रों की मांग मान ली है, लेकिन CBI जांच की मांग को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने कहा कि सरकार का दावा है कि उसने परीक्षा रद्द कर दी, लेकिन जब अदालत ने इस फैसले पर रोक लगा दी तो सरकार जिम्मेदारी अदालत पर डालने की कोशिश कर रही है. उनके मुताबिक, इससे सरकार अपनी कथित गलती छिपाने का प्रयास कर रही है.
पुतला दहन के दौरान छात्रों की पिटाई का भी उठाया मुद्दा
चंपाई सोरेन ने हाल के दिनों में छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कोर्ट की ओर से परीक्षा रद्द करने के फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद छात्रों ने 24 जिलों में पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष के लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की और पुलिस ने भी छात्रों पर कार्रवाई की. उन्होंने कहा कि सरकार चाहती थी कि छात्रों और दूसरे पक्ष के बीच टकराव हो, लेकिन छात्रों ने संयम बनाए रखा.
चंपाई सोरेन ने गिरिडीह, रांची और हजारीबाग में छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता की निंदा करते हुए कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है.
यह राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्र आंदोलन में सभी समुदायों के लोग शामिल हैं. यह किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि छात्रों के भविष्य और नियुक्तियों में पारदर्शिता की लड़ाई है.
उन्होंने कहा कि झारखंड जिस उद्देश्य से अलग राज्य बना था, सरकार उस उद्देश्य से भटक गई है. अलग राज्य बनने के 26 साल बाद भी युवाओं को पारदर्शी नियुक्तियां नहीं मिल पा रही हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया उदाहरण
चंपाई सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अगर एक बूंद जहर पूरे गिलास पानी में मिल जाए तो पूरे गिलास को फेंकना पड़ता है. उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में अगर गंभीर गड़बड़ी हुई है तो उसके पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है. उन्होंने कहा कि सरकार के पास 15 सितंबर तक अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का समय है. ऐसे में सरकार को छात्रों की मांग और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट रूप से अदालत के सामने रखना चाहिए. चंपाई सोरेन ने कहा कि छात्र पीछे हटने वाले नहीं हैं और सरकार को उनकी मांगों का तथ्यात्मक जवाब देना होगा.
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