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    Home»जोहार ब्रेकिंग»बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भूचाल: मनन मिश्रा पर 150 करोड़ ट्रांसफर, वसूली और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप
    जोहार ब्रेकिंग

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया में भूचाल: मनन मिश्रा पर 150 करोड़ ट्रांसफर, वसूली और भाई-भतीजावाद के गंभीर आरोप

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkAugust 22, 2026No Comments5 Mins Read8
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    नालसार (NALSAR) के छात्रों के नामांकन पर रोक लगाने के विवाद के बाद अब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर ही चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ खुला विरोध सामने आया है. बीसीआई के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने 22 अगस्त को मिश्रा को पत्र लिखकर तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है. छह पन्नों के इस पत्र में रेड्डी ने बीसीआई के कामकाज, वित्तीय प्रबंधन, नियुक्तियों और चेयरमैन के फैसले लेने के तरीके पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

    रेड्डी ने कहा है कि BCI किसी व्यक्ति की निजी संस्था नहीं, बल्कि Advocates Act, 1961 के तहत गठित वैधानिक निकाय है. इसके पास अधिवक्ताओं से प्राप्त धन और पेशे में प्रवेश से लेकर कानूनी शिक्षा तक को रेगुलेट करने की शक्तियां हैं. ऐसे में परिषद के हर फैसले और खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है.

    क्या है NALSAR विवाद, जिसने बढ़ाई अंदरूनी नाराजगी

    दरअसल, यह विवाद 13 अगस्त से शुरू होती है, जब हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law के 2026 बैच के कुछ छात्रों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को विश्वविद्यालय के दिक्षांत समारोह में बुलाने पर आपत्ति जताई गई थी. इसका संदर्भ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई की टिप्पणी से था. जिसके बाद बीसीआई के चेयरमैन मनन मिश्रा के कार्यालय से निर्देश जारी हुआ कि NALSAR के 2026 में पास होने वाले किसी भी छात्र का टेस्ट स्टेट बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में नामंकन अगले आदेश तक नहीं किया जाए. साथ ही उन लोगों की पहचान करने को कहा गया था जिन्होंने आपत्ति जताई थी.

    इस आदेश पर बीसीआई के कई पदाधिकारियों ने आपत्ति जताई थी, बताया गया कि सभी सदस्यों से आदेश से पहले मंजूरी नहीं ली गई. विरोध करने वालों में को-चेयरमैन वाई. आर. सदाशिव रेड्डी और अन्य सदस्य शामिल थे.

    NALSAR मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 अगस्त को सुनवाई हुई थी. CJI सूर्यकांत ने बीसीआई के हस्तक्षेप पर तीखी टिप्पणी की और सवाल उठाया कि छात्रों और उनके बीच हुई बातचीत में बीसीआई को हस्तक्षेप करने अधिकार किस आधार पर है. बाद में BCI ने अपना आदेश वापस ले लिया और 2026 बैच के खिलाफ आगे की कार्यवाही भी बंद कर दी. मनन कुमार मिश्रा ने बाद में छात्रों से माफी भी मांगी.

    NALSAR प्रकरण के बाद BCI के कामकाज और चेयरमैन के अधिकारों को लेकर सवाल उठे. दिल्ली में 20 अगस्त को BCI कार्यालय के बाहर वकीलों ने मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया. अब इसी माहौल के बीच BCI के अंदर से ही को-चेयरमैन सदाशिव रेड्डी का पत्र सामने आया है.

    150 करोड़ BCI Trust PEARL-First में ट्रांसफर का आरोप

    रेड्डी ने सबसे गंभीर आरोप बीसीआई के करीब 150 करोड़ के फंड को BCI Trust PEARL-First से जोड़ते हुए लगाया है. उनका दावा है कि परिषद के धन को एक नए ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया की गई और इस पर बीसीआई के सदस्यों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई.

    रेड्डी ने सवाल उठाया है कि Advocates Act के तहत गठित वैधानिक संस्था के धन को इस तरह किसी ट्रस्ट में स्थानांतरित करने का अधिकार किस आधार पर इस्तेमाल किया गया. उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड परिषद के सदस्यों के सामने रखने की मांग की है.

    लॉ कॉलेजों से 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक योगदान का आरोप, करीबियों के नियुक्तियों पर उठा सवाल

    रेड्डी ने बीसीआई से मान्यता या मान्यता के नवीनीकरण के लिए आने वाले कुछ कानून कॉलेजों से कथित तौर पर 25 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये तक योगदान लिए जाने का भी आरोप लगाया है. उनका कहना है कि इस तरह की रकम BCI से जुड़े ट्रस्ट को देने के लिए कॉलेजों पर दबाव बनाया जाता है.

    रेड्डी ने मांग की है कि BCI या उससे जुड़े किसी ट्रस्ट अथवा संस्था द्वारा कानून कॉलेजों, विश्वविद्यालयों या उनके प्रबंधन से किसी भी प्रकार का योगदान, दान या भुगतान तत्काल स्वीकार करना बंद किया जाए. को-चेयरमैन ने BCI के कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि परिषद के मौजूदा स्टाफ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो चेयरमैन से व्यक्तिगत रूप से जुड़े हैं और इनमें उनके परिवार के सदस्य या रिश्तेदार भी शामिल हैं.

    रेड्डी का दावा है कि उन्होंने नियुक्तियों से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की तो उन्हें कई मामलों में भर्ती का सार्वजनिक विज्ञापन, चयन समिति की कार्यवाही या तुलनात्मक मेरिट सूची नहीं मिली. उन्होंने BCI की पूरी स्टाफ स्थिति और नियुक्तियों से जुड़े रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है.

    चेयरमैन से 15 दिन में इस्तीफा देने की मांग

    रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा से तत्काल पद छोड़ने की मांग की है. पत्र में कहा गया है कि यदि वह तत्काल इस्तीफा नहीं देते हैं तो पत्र मिलने के 15 दिनों के भीतर उन्हें चेयरमैन पद से इस्तीफा देना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग की है, जिसमें पत्र में उठाए गए सभी मुद्दों पर चर्चा हो और संबंधित रिकॉर्ड सभी सदस्यों को पहले से उपलब्ध कराया जाए.

    रेड्डी ने BCI के खातों के साथ-साथ BCI Trust PEARL-First के गठन से लेकर अब तक के खातों का विशेष ऑडिट कराने की मांग की है. उनका कहना है कि यह ऑडिट स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाए और इसकी रिपोर्ट BCI के सभी सदस्यों को उपलब्ध कराने के साथ सार्वजनिक की जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि BCI की वेबसाइट पर परिषद के कर्मचारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए.

    Also Read : झारखंड : जेएसएससी सीजीएल रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, 1,932 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

    BCI बीसीआई मनन मिश्रा
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