झारखंड ज्यूडिशियल सर्विस प्रीलिम्स परीक्षा 2023 की संशोधित मेरिट लिस्ट से बाहर किए गए 35 अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी. हालांकि, कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज करने के बजाय उसे निरर्थक (infructuous) मानकर निस्तारित कर दिया. दरअसल, सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि झारखंड सरकार ने पूरी प्रारंभिक परीक्षा ही रद्द कर दी है. इसके बाद संशोधित मेरिट लिस्ट को चुनौती देने का मामला ही प्रभावहीन हो गया.
सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष याचिका पर सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि संबंधित पूरी परीक्षा रद्द की जा चुकी है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को निरर्थक मानते हुए मामले का निस्तारण कर दिया.
क्या है पूरा मामला?
यह मामला झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विज्ञापन संख्या 22/2023 के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की भर्ती से जुड़ा था. इसकी प्रारंभिक परीक्षा 10 मार्च 2024 को 138 पदों के लिए आयोजित हुई थी. परीक्षा के बाद उत्तर-कुंजी को लेकर विवाद शुरू हुआ. जेपीएससी ने उत्तर-कुंजी में कई बार बदलाव किया और तीसरी संशोधित उत्तर-कुंजी 13 मई 2024 को जारी की. इसके बाद जेपीएससी ने 2 जुलाई 2024 को परिणाम जारी करते हुए करीब 1,797 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया था.
इनमें लगभग 184 अभ्यर्थी अगले चरण के लिए दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया तक पहुंच चुके थे. बाद में विवाद इन्हीं पहले सफल घोषित अभ्यर्थियों में से कुछ को नई मेरिट लिस्ट से बाहर किए जाने को लेकर हुआ. इसके बाद तीन सवालों के उत्तर को लेकर विवाद खड़ा हुआ. झारखंड हाईकोर्ट ने इन सवालों के उत्तरों को गलत मानते हुए अंकों की दोबारा गणना कर नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का निर्देश दिया था. जेपीएससी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.
सुप्रीम कोर्ट ने 9 फरवरी 2026 को कहा था कि हाईकोर्ट खुद को दोबारा परीक्षा लेने वाले या विषय विशेषज्ञ की भूमिका में नहीं रख सकता. कोर्ट ने हाईकोर्ट की प्रशासनिक समिति को विवादित सवालों की दोबारा जांच कर अपनी राय जेपीएससी को देने का निर्देश दिया था.
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रक्रिया दोबारा चली. जेपीएससी ने 1 जून 2026 को अंतिम उत्तर-कुंजी जारी की. दो विवादित सवालों को हटा दिया गया, जबकि एक सवाल का उत्तर बदल दिया गया. इसके आधार पर आयोग ने सभी अभ्यर्थियों के अंकों की दोबारा गणना की और 5 जून 2026 को संशोधित परिणाम-सह-मेधा सूची जारी की. इस संशोधित सूची से पहले सफल घोषित किए गए 35 अभ्यर्थी बाहर हो गए.
बाहर हुए 35 अभ्यर्थियों ने दी थी चुनौती
इन 35 अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर संशोधित मेधा सूची को चुनौती दी थी. उनका कहना था कि वे पहले ही सफल घोषित किए जा चुके थे और अगले चरण के लिए दस्तावेज भी जमा कर चुके थे. उनका तर्क था कि उत्तर-कुंजी में सुधार के बाद उनकी पहले से मिली सफलता को संरक्षित किया जाना चाहिए था.
हालांकि, अब झारखंड सरकार के द्वारा 18 अगस्त को पूरी परीक्षा ही रद्द किए जाने के कारण संशोधित मेधा सूची से जुड़े इस विवाद का कोई स्वतंत्र आधार नहीं बचा. सुप्रीम कोर्ट ने इसी वजह से रिट याचिका (सिविल) संख्या 777/2026, शुभेंदु मिश्रा बनाम झारखंड लोक सेवा आयोग को निरर्थक मानते हुए निस्तारित (खत्म) कर दिया.
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