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    Home»जोहार ब्रेकिंग»दिल्ली में CJP आंदोलन का विरोध, JPSC के लिए जनहित याचिका लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट तक, हरिशरण देवगन को झारखंड में इतनी दिलचस्पी क्यों?
    जोहार ब्रेकिंग

    दिल्ली में CJP आंदोलन का विरोध, JPSC के लिए जनहित याचिका लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट तक, हरिशरण देवगन को झारखंड में इतनी दिलचस्पी क्यों?

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkAugust 22, 2026Updated:August 23, 2026No Comments4 Mins Read10
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    झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. परीक्षा रद्द कराने, दोबारा परीक्षा कराने और मामले की सीबीआई जांच की मांग करने वाली जनहित याचिका दाखिल करने वाले हरिशरण देवगन की भूमिका अब सवालों के घेरे में है.

    सवाल यह है कि दिल्ली में CJP आंदोलन और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर मुखर रहने वाले हरिशरण देवगन को झारखंड के JPSC विवाद में अचानक इतनी दिलचस्पी क्यों हो गई? उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में उनकी पहचान न तो JPSC अभ्यर्थी के रूप में सामने आती है और न ही झारखंड के किसी छात्र आंदोलन से उनके जुड़ाव की जानकारी मिलती है.

    CJP आंदोलन को बताया था अराजकता, प्रदर्शनकारियों पर उठाए थे सवाल

    हरिशरण देवगन के X अकाउंट से जुलाई महीने में CJP आंदोलन को लेकर कई पोस्ट किए गए. एक 20 जुलाई को किए गए एक पोस्ट में उन्होंने संसद की ओर मार्च करने के प्रयास को लेकर प्रदर्शनकारियों की आलोचना की. उन्होंने लिखा कि बिना अनुमति संसद तक जबरदस्ती मार्च करने का प्रयास किया गया और ऐसी अराजकता या गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसके लिए प्रशासन से अनुमति जरूरी है.

    इसी दौरान उन्होंने आंदोलन से जुड़े सोनम वांगचुक को लेकर भी सवाल उठाए. एक अन्य पोस्ट में उन्होंने जम्मू-कश्मीर, राष्ट्रगान और संविधान बचाने के आंदोलन को लेकर टिप्पणी करते हुए वांगचुक से पूछा कि उन्होंने 2014 से पहले कोई आंदोलन या प्रदर्शन क्यों नहीं किया.

    राहुल गांधी के प्रदर्शन को बताया था राजनीतिक साजिश

    बीते 23 जुलाई को किए गए एक पोस्ट में देवगन ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को लेकर भी तीखी टिप्पणी की. उन्होंने प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक मकसद होने का आरोप लगाया और इसे सोशल मीडिया नैरेटिव से जोड़ते हुए अपनी राय रखी.

    उन्होंने अपने पोस्ट में यह दावा भी किया कि राहुल गांधी आंदोलन का श्रेय हासिल करने के लिए प्रदर्शन का केंद्र बदलने की कोशिश कर रहे थे. यह देवगन की सार्वजनिक राजनीतिक टिप्पणियों की एक झलक है, जिसमें वह अलग-अलग आंदोलनों और विपक्षी नेताओं की मंशा पर सवाल उठाते रहे हैं.

    अब JPSC मामले में सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचे?

    अब यही सवाल झारखंड के JPSC विवाद में उठ रहा है. जिस व्यक्ति ने दिल्ली के आंदोलन में प्रदर्शनकारियों और आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाए, वही व्यक्ति झारखंड की एक भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग कर रहा है.

    हरिशरण देवगन ने JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं को लेकर जनहित याचिका दाखिल की है. सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक याचिका का डायरी नंबर 47998/2026 है. इसे 8 अगस्त 2026 को दाखिल किया गया था और 19 अगस्त को W.P.(C) No. 1047/2026 के रूप में रजिस्टर किया गया. याचिका पर 24 अगस्त को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है. लेकिन देवगन का JPSC से सीधा संबंध क्या है और उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का फैसला क्यों किया, यह सवाल अब भी बना हुआ है.

    मंशा पर सवाल, लेकिन जवाब जरूरी

    जेपाएससी विवाद पहले से ही झारखंड के युवाओं और छात्र संगठनों से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है. ऐसे में किसी ऐसे व्यक्ति का इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचना, जिसका इस परीक्षा या राज्य के आंदोलन से सीधा संबंध सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है, स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है.
    आखिर झारखंड के JPSC विवाद में उनकी दिलचस्पी की वजह क्या है? क्या यह वास्तव में परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जनहित में उठाया गया कदम है या इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद है?

    Also Read: आंदोलन दबाने के लिए खेला चालाकी का खेल: JPSC-JSSC विवाद पर चंपाई सोरेन का सरकार पर तीखा हमला

    JPSC जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट हरिशरण देवगन
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