रांची: झारखंड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 (जेएसएससी-सीजीएल) में कथित अनियमितता की जांच अब और तेज हो गई है. इस मामले में सीआईडी की SIT ने अभय कुमार तिवारी, अक्षय कुमार तिवारी और सुषमा कुमारी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. वहीं, मामले से जुड़े 18 संदिग्ध और संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की जा चुकी है. सीआईडी ने रविवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि मामले के दूसरे पहलुओं पर आगे की जांच लगातार जारी है.
इस कार्रवाई के साथ जेएसएससी-सीजीएल मामले की जांच अब उस चरण में पहुंच गई है, जहां सीआईडी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए कथित परीक्षा अनियमितता की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है. खास बात यह है कि रिमांड पर लिए गए तीनों नाम सीधे अभय तिवारी से जुड़े हैं. अभय तिवारी इस मामले में पहले से सीआईडी की जांच के केंद्र में है, जबकि अक्षय कुमार तिवारी उसका भाई और सुषमा कुमारी उसकी पत्नी हैं. दोनों को सीआईडी ने 18 अगस्त को गिरफ्तार किया था.
अभय तिवारी की गिरफ्तारी से खुला मामला
सीआईडी ने अभय कुमार तिवारी को 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था. वह गोड्डा के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था और इससे पहले परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था. जांच में उसकी भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण मानी गई क्योंकि वह खुद कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल रहा था और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी एजेंसी में काम करने का उसका पुराना अनुभव था.
सीआईडी की पूछताछ के बाद उसके बारे में कई गंभीर जानकारियां जांच के दायरे में आईं. अधिकारियों के मुताबिक, अभय ने करीब 13 वर्षों में लगभग 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं. इनमें पुलिस सब-इंस्पेक्टर, नेवी, BARC, CRPF और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल थीं. पूछताछ में कथित तौर पर अलग-अलग परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को सफल कराने के लिए अलग-अलग रकम के रेट की बात भी सामने आई. इन दावों की जांच सीआईडी कर रही है.
भाई और पत्नी भी CGL में चयनित
जांच आगे बढ़ी तो अभय तिवारी के परिवार तक भी पहुंची. उसके भाई अक्षय कुमार तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी ने भी जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा पास की थी. दोनों की गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने उनके चयन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी भूमिका की भी जांच शुरू की.
यही वजह है कि अब तीनों को एक साथ रिमांड पर लेकर पूछताछ करना जांच की अहम कड़ी माना जा रहा है. हालांकि, केवल किसी आरोपी के रिश्तेदार का परीक्षा में चयनित होना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है. उनकी भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा.
जेएसएससी कार्यालय तक पहुंची सीआईडी की जांच
मामले की जांच अब केवल आरोपियों और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रही. सीआईडी ने जेएसएससी कार्यालय में भी कार्रवाई की और आयोग के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूछताछ की. चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की गई.
इससे यह साफ है कि SIT परीक्षा में कथित अनियमितता की पूरी प्रक्रिया को खंगाल रही है. जांच में परीक्षा कराने वाली एजेंसी, आयोग से जुड़े लोग, चयनित अभ्यर्थी और उन तक कथित तौर पर पहुंची जानकारी जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं.
जेएसएससी-सीजीएल की जांच के समानांतर JPSC से जुड़े कथित परीक्षा घोटाले की जांच में भी सीआईडी ने कार्रवाई की है. इस मामले में मनोज कुमार, रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई थी. इससे भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा लगातार बढ़ता गया है.
सरकार ने रद्द किया जेएसएससी-सीजीएल का पूरा भर्ती चक्र
जेएसएससी-सीजीएल विवाद का सबसे बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सरकार का पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला रहा. परीक्षा में पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं के आरोपों के बाद पहले परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई गई थी. बाद में परिणाम और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन विवाद खत्म नहीं हुआ.

राज्य सरकार ने 18 अगस्त 2026 में जेएसएससी-सीजीएल समेत कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए संबंधित प्रक्रियाओं को रद्द किया और कई पुरानी परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए.
इस फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में भी नाराजगी फैल गई और दूसरी तरफ परीक्षा में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे छात्रों का आंदोलन भी तेज हुआ. बाद में आंदोलनकारियों ने सरकार को दो महीने का समय देते हुए आंदोलन स्थगित कर दिया.
अब 18 लोगों से पूछताछ ने बढ़ाई हलचल
ताजा सीआईडी प्रेस विज्ञप्ति में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी यह है कि SIT ने 18 संदिग्ध/संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की है. हालांकि सीआईडी ने इन 18 लोगों के नाम और पूछताछ में सामने आई जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
अब रिमांड पर तीन आरोपियों से होने वाली पूछताछ और पहले पूछताछ किए गए लोगों से मिली जानकारी को जोड़कर SIT कथित अनियमितता की पूरी कड़ी तलाशेगी. सीआईडी ने साफ किया है कि जांच अभी जारी है. ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों की भूमिका सामने आने या आगे कार्रवाई होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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