सिलीगुड़ी : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 22 अगस्त को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ अहम बैठक की. इस दौरान उन्होंने पूर्वी सीमा की सुरक्षा, सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकन नेक’ की सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख दिखाया. शाह ने कहा कि हिंदू, जैन और सिख शरणार्थियों को अगले छह महीने के भीतर नागरिकता दी जाएगी, जबकि घुसपैठियों को बंगाल से बाहर भेजा जाएगा.
गृह मंत्री ने यह बयान ऐसे समय दिया है, जब केंद्र सरकार का फोकस पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर को जोड़ने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा मजबूत करने पर है. यह संकरा गलियारा देश के बाकी हिस्सों को पूर्वोत्तर के राज्यों से जोड़ता है और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है.
‘चिकन नेक’ की सुरक्षा पर हुई अहम बैठक
अमित शाह ने शनिवार को सुकना में पश्चिम बंगाल और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में सीमा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई. BSF और SSB के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा खुफिया एजेंसियों, केंद्रीय सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस-प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे. बैठक में सीमा पर निगरानी मजबूत करने, सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और एक ‘ट्राएंगुलर सिक्योरिटी ग्रिड’ तैयार करने पर चर्चा हुई.
अमित शाह ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में SSB के एक कार्यक्रम में कहा था कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाका है. यह गलियारा देश के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ता है. उन्होंने बताया था कि इस क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने के लिए असम के धुबरी, बिहार के किशनगंज और पश्चिम बंगाल के चोपड़ा में तीन नए सैन्य गैरीसन स्थापित किए जाएंगे. इन तीनों केंद्रों को जोड़कर सुरक्षा का त्रिकोण तैयार करने की योजना है.
हिंदू, जैन और सिख शरणार्थियों को नागरिकता देने का दावा
अमित शाह ने CAA के तहत पात्र शरणार्थियों को नागरिकता देने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि हिंदू, जैन और सिख शरणार्थियों को छह महीने के भीतर नागरिकता दी जाएगी. CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के पात्र लोगों के लिए भारतीय नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया आसान की गई है.
गृह मंत्री ने अवैध घुसपैठ को लेकर भी सख्त संदेश दिया. उन्होंने कहा कि बंगाल में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठियों की पहचान की जाएगी और उन्हें वापस भेजा जाएगा. शाह के इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल में नागरिकता और घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है.
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक अहमियत इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि इसके आसपास नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं. करीब 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा यह इलाका भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख भूमि मार्ग है.
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