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    Home»बिहार»दरभंगा की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन
    बिहार

    दरभंगा की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन

    Team JoharBy Team JoharJanuary 12, 2026Updated:January 12, 2026No Comments3 Mins Read3
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    महारानी
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    Darbhanga : बिहार से एक दुखद समाचार सामने आया है। दरभंगा राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य और महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को निधन हो गया। वे लगभग 96 वर्ष की थीं और बीते कुछ दिनों से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं। उन्होंने दरभंगा स्थित राज परिसर के कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से न केवल दरभंगा बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।

    राज परिवार में शोक

    महारानी कामसुंदरी देवी दरभंगा के प्रसिद्ध महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। उनकी शादी 1940 के दशक में महाराजा कामेश्वर सिंह से हुई थी। महाराजा की पहली दो पत्नियां—महारानी राजलक्ष्मी और महारानी कामेश्वरी प्रिया—का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में महारानी कामसुंदरी देवी राज परिवार की सबसे वरिष्ठ सदस्य थीं। उनके निधन से राज परिवार में गहरा शोक व्याप्त है।

    समाज सेवा को समर्पित रहा जीवन

    महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन समाज सेवा और परोपकार को समर्पित रहा। उन्होंने न केवल अपने धर्म का निष्ठापूर्वक पालन किया बल्कि अपने कर्तव्यों का भी पालन उतनी ही इमानदरी से किया। राज परिवार की प्रतिष्ठित सदस्य तथा एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी जानी जाती थीं। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। अपने पति महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति में उन्होंने “महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” की स्थापना की थी, जो आज भी मिथिला क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के कई कार्य संचालित कर रहा है।

    शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अहम योगदान

    फाउंडेशन के माध्यम से महारानी ने छात्रवृत्ति योजनाएं, विद्यालयों की स्थापना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिससे गरीब और जरूरतमंद छात्रों को शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर मुफ्त और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।

    कमजोर वर्गों के लिए सतत प्रयास

    महारानी कामसुंदरी देवी समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर कार्य करती रहीं। उनके प्रयासों से कई अनाथालय, वृद्धाश्रम और सामाजिक संस्थान संचालित हो रहे हैं, जो आज भी जरूरतमंदों के लिए सहारा बने हुए हैं। उनकी समाजसेवी सोच ने मिथिला क्षेत्र के सामाजिक विकास में स्थायी प्रभाव छोड़ा है।

    अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

    महारानी के निधन की खबर मिलते ही राज परिसर और कल्याणी निवास में लोगों का तांता लग गया। बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राज परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने उन्हें सादगी, उदारता और समाज सेवा के लिए याद किया। महारानी कामसुंदरी देवी का जीवन समाज सेवा और मानवीय मूल्यों की एक मिसाल था। उनके निधन से एक युग का अंत हुआ है, लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्य और उनकी समाजसेवी विरासत हमेशा जीवित रहेगी।

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