Johar Live Desk : श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार सुबह ISRO ने PSLV-C62 रॉकेट के जरिए अन्वेषा सैटेलाइट और 14 को‑पैसेंजर सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे। इन सभी सैटेलाइट्स को सूर्य-समकालिक कक्षा (SSO) में स्थापित किया जाएगा।
मुख्य सैटेलाइट अन्वेषा है, जिसे DRDO ने विकसित किया है। यह एक उन्नत इमेजिंग सैटेलाइट है, जो जंगल, झाड़ी या बंकर में छिपे दुश्मनों की गतिविधियों को भी हाई रेज़ोल्यूशन इमेजिंग के जरिए पहचान सकता है। अन्वेषा HRS (हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग) तकनीक पर काम करता है, जो रोशनी के सैकड़ों बारीक रंगों को पहचान सकता है और भूमि, पौधे या किसी भी गतिविधि की सही जानकारी दे सकता है।
अन्वेषा सैटेलाइट का इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र के साथ-साथ जंगल, माइनिंग और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की निगरानी में किया जाएगा। सेना इसके डेटा का उपयोग सीमाई इलाकों में दुश्मन की गतिविधियों, सही रूट और फॉर्मेशन की पहचान के लिए कर सकती है। इस PSLV-C62 मिशन में कुल 15 सैटेलाइट्स लॉन्च किए गए, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट शामिल हैं। विदेशी सैटेलाइट्स फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूके के हैं। हैदराबाद की निजी कंपनी ध्रुवा स्पेस ने इस मिशन में अपने 7 सैटेलाइट लॉन्च किए। यह ISRO के 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन है और PSLV की 64वीं उड़ान है।
PSLV रॉकेट को विश्व के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिना जाता है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन और आदित्य-L1 जैसे महत्वपूर्ण मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं। PSLV का पिछला मिशन PSLV-C61 था, जिसमें EOS-09 सैटेलाइट को लॉन्च किया गया था। अन्वेषा, भारत के पहले HySIS सैटेलाइट का अपग्रेडेड वर्जन है और इसकी हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग क्षमता उससे कहीं ज्यादा है। इससे भारत की अंतरिक्ष और रक्षा क्षमता मजबूत होगी।
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