किसलय शानू
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से अफीम की खेती और तस्करी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती थी. क्योंकि राज्य के आठ जिले में अफीम की खेती बड़े पैमाने पर होती थी. बढ़ती खेती, खेती से राज्य में फैलते तस्करों का नेटवर्क और फिर उस नेटवर्क के रास्ते ब्लैक मनी का फ्लो. यही नहीं, फिर ब्लैक मनी की सप्लाई प्रतिबंधित संगठनों, लेकिन इन सब से अहम राज्य के युवाओं का दलदल में धंसते जाना. सोना झारखंड को उड़ता झारखंड बनने से रोकने का अहम वक्त आ चुका था.
लगातार बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सीएम हेमंत सोरेन ने इसे गंभीरता से लिया. अधिकारियों की मीटिंग बुलाई, योजना तैयार कराई. बिना किसी एक्सक्यूज के इसे लागू करने का निर्देश दिया. इसी सख्ती के मुताबिक झारखंड सीआइडी मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024-2025 के दौरान अफीम तस्करों ने कुल 27015.035 एकड़ में अफीम की खेती की थी.
यह खेती मुख्य रूप से झारखंड के आठ जिलें में हुई थी. इनमें चतरा, खूंटी, लातेहार, रांची, पलामू, चाईबासा, सरायकेला और हजारीबाग जिला का नाम शामिल है. लेकिन पुलिस ने इन तस्करों के मंसूबे पर पानी फेरते हुए सख्ती से कार्रवाई शुरु की और उक्त जिले में की गयी खेती को पूरी तरह से नष्ट कर दिया.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सख्ती और पुलिस की इस कार्रवाई का असर यह हुआ कि अफीम तस्करों ने उक्त आठ जिले अफीम की फसलीय वर्ष 2025-2026 के दौरान सिर्फ चार हजार से कम की एकड़ में खेती कर सकें. जिसे पुलिस ने अभियान चलाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया.
एक आइएएस और तीन आइपीएस ने तैयार की योजना
मुख्यमंत्री के निर्देश पर सबसे पहले गृह सचिव वंदना दादेल ने एक्शन प्लान तैयार किया था. इस योजना को क्रियान्वित करने के इन्हें तीन आइपीएस अधिकारियों ने सहयोग किया. इनमें डीजीपी तदाशा मिश्र, एडीजी सीआइडी मनोज कौशिक और एएनटीएफ के झारखंड चीफ सह आइजी असीम विक्रांत मिंज का नाम शामिल हैं.
एक्शन प्लान के छह प्रमुख बिंदु निर्धारित किये गये. इनमें पहला था अफीम की अवैध खेती से प्रभावित इलाके को चिह्नित करना. दूसरा, जागरूकता अभियान चलाना. तीसरा, अफीम की खेती में प्रयुक्त उपकरण की बिक्री पर निगरानी रखना. चौथा, अन्य संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करना. पांचवां, अफीम की खेती नष्ट करने के लिए आवश्यक संसाधन के लिए सरकार और मुख्यायल से पत्राचार करना और छठा, वैल्पिक खेती के लिए प्रशासनिक सहयोग.
जागरूकता अभियान चलाने के लिए पंचायत प्रतिनिधियों को भी शामिल करना.इसके अलावा वन विभाग और जिला प्रशासन से सहयोग लेकर अभियान चलाया गया. जिसके परिणाम हुआ कि जो जिला अफीम की खेती के लिए चर्चित हो चुके थे. इसमें वर्ष 2025-2026 के दौरान अधिक खेती नहीं हुई.
सीआइडी मुख्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार अफीम की फसलीय वर्ष 2021-22 के दौरान चतरा, खूंटी, लातेहार, रांची, पलामू, चाईबासा, सरायकेला और हजारीबाग में कुल 2871.02 एकड़ में अफीम की खेती नष्ट किया गया था. इसी तरह 2022-2023 में उक्त जिलों में 5494.1 और 2023-2024 में 4853.995 में अफीम की फसल को नष्ट किया गया था.
वर्ष 2024-2025 के दौरान पुलिस की कार्रवाई
जिला का नाम- दर्ज केस – गिरफ्तारी- कितने एकड़ में फसल नष्ट हुआ-
रांची – 100 – 33 – 6843.47 एकड़
खूंटी- 67- 89- 15246.79एकड़
लोहरदगा- 00- 00- 00
सिमडेगा- 00- 00- 00
सरायकेला- 32- 19- 678.96
पलामू – 15- 12- 604.125
लातेहार – 17- 06- 754
हजारीबाग – 15- 09- 525.18
चाईबासा – 25- 13- 796.05
चतरा – 42- 56- 1566.46
कोडरमा – 00- 00- 00
देवघर – 00- 00- 00

वर्ष 2025-2026 के दौरान पुलिस की कार्रवाई
जिला का नाम- दर्ज केस- गिरफ्तारी- कितने एकड़ में फसल नष्ट हुआ
रांची- 07- 00- 34.50
खूंटी – 10- 01- 215.71
लोहरदगा – 01- 00- 3.25
सिमडेगा – 02- 12- 3.5
सरायकेला – 03- 00- 24.70
पलामू – 00- 00- 314.62
लातेहार – 11- 09- 832.14 + गांजा 02
हजारीबाग – 08- 01- 393
चाईबासा – 12- 00- 52.69
चतरा – 21- 25- 2742.22
कोडरमा – 01- 00- 3
देवघर – 01- 00- 0.01

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