झारखंड पहली बार 25 जुलाई से एशिया के सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप की मेजबानी करने जा रहा है. राज्य सरकार फुटबॉल और खिलाड़ियों को नई पहचान दिलाने की कोशिश में जुटी है. लेकिन टूर्नामेंट शुरू होने से ठीक पहले देवघर के डे-बोर्डिंग बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र की खिलाड़ियों ने जिला खेल पदाधिकारी (डीएसओ) पर ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्होंने खेल विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
दरअसल, देवघर स्थित डे-बोर्डिंग बालिका फुटबॉल प्रशिक्षण केंद्र की खिलाड़ियों आरोप लगाया है कि महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ट्रेनिंग नहीं, मानसिक प्रताड़ना और जाति सूचक गालियां दी जा रही है. उन्होने इसको लेकर खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के सचिव को आवेदन दिया है. महिला खिलाड़ियों का आरोप है कि जिला खेल पदाधिकारी (डीएसओ) और जिला खेल कार्यालय के एक क्लर्क के द्वारा दुर्व्यवहार किया जा रहा है. उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और एससी-एसटी वर्ग की खिलाड़ियों के लिए जातिसूचक आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है.
खेल में हिस्सा लेने से रोका गया और खेल सामग्री भी नहीं दी गई
खिलाड़ियों ने आवेदन में कहा है कि 23 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक दिवस पर हुए कार्यक्रम में उन्हें न तो पहले से कोई सूचना दी गई. जिसके कारण उन्हें खेल में हिस्सा लेने का मौका नहीं मिला. इससे पहले हुए खेल आयोजनों में भी फुटबॉल प्रतियोगिता नहीं कराई गई, जबकि देवघर में बालिका फुटबॉल का डे-बोर्डिंग सेंटर चल रहा है.
खिलाड़ियों का आरोप है कि सेंटर में जरूरी खेल सामग्री तक नहीं है. जिला कार्यालय में सामान होने के बावजूद खिलाड़ियों को फुटबॉल, बूट और दूसरी जरूरी चीजें नहीं दी जा रही हैं. कई बार मांग करने के बाद जनवरी 2026 में कुछ सामान मिला, लेकिन जरूरी सामग्री अब भी नहीं दी गई. नए सत्र की खेल सामग्री आने के बाद भी उसका वितरण नहीं हुआ है.
सेंटर बंद कराने की दी जाती है धमकी, छात्रवृति भी रोकी गई
आवेदन में यह भी कहा गया है कि डीएसओ पुराने खिलाड़ियों को हटाने और सेंटर बंद कराने की धमकी देते हैं. खिलाड़ियों का आरोप है कि उनके आने के बाद से एससी-एसटी वर्ग की खिलाड़ियों को धीरे-धीरे सेंटर से बाहर किया गया और उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती हैं.
खिलाड़ियों ने बताया कि 25 खिलाड़ियों की क्षमता वाले सेंटर में अभी सिर्फ 14 खिलाड़ी ही प्रशिक्षण ले रही हैं. जबकि 11 सीटें खाली हैं, लेकिन नए खिलाड़ियों का चयन नहीं कराया जा रहा है. कोच की ओर से कई बार पत्र देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई.
खिलाड़ियों ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले 16 महीने से उन्हें पूरी छात्रवृत्ति नहीं मिली है. जब उन्होंने इस बारे में डीएसओ से बात की तो कथित तौर पर उन्हें सेंटर से बाहर निकालने की धमकी दी गई.
आवेदन में खिलाड़ियों ने खेल विभाग के सचिव से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों पर कार्रवाई करने, लंबित छात्रवृत्ति का भुगतान कराने और खिलाड़ियों को सम्मानजनक माहौल व जरूरी खेल सामग्री उपलब्ध कराने की मांग की है.
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