मध्य प्रदेश में केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य विकास कार्यों के विरोध में चल रहा 15 दिनों का आंदोलन रविवार को समाप्त हो गया. पुलिस ने प्रदर्शन स्थल खाली कराकर प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए उनके गांव भेज दिया. हालांकि, कुछ ग्रामीणों ने आंदोलन के नेता अमित भटनागर को हिरासत में लेने का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने किसी भी तरह की गिरफ्तारी या हिरासत से इनकार किया है.
दरअसल, रविवार की सुबह करीब 5 बजे बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी प्रदर्शन स्थल पहुंचे और कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया. आंदोलनकारियों का दावा है कि आंदोलन के प्रमुख नेता अमित भटनागर परियोजना से जुड़े कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के मामले का खुलासा कतरने वाले थे. इसलिए उन्हें हिरासत में लिया गया.
वहीं, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी एक निर्माणाधीन पुल के नीचे और नदी के बीच धरना दे रहे थे. लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण वहां लोगों की जान को खतरा था, इसलिए सुरक्षा के मद्देनजर प्रदर्शन समाप्त कराया गया.
प्रदर्शनकारियों को भेजा गया गांव, हिरासत से पुलिस का इनकार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आंदोलन के नेता अमित भटनागर लंबे समय से भूख हड़ताल पर थे. उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए उनके गृह जिलों में भेजा गया.
अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल सभी लोग पन्ना जिले के निवासी थे. यदि उन्हें किसी तरह की शिकायत थी तो उन्हें अपने जिले में प्रदर्शन करना चाहिए था. उनका प्रदर्शन स्थल से कोई सीधा संबंध नहीं था. पन्ना जिले के लोगों को पन्ना और छतरपुर व आसपास के क्षेत्रों के लोगों को उनके गांव पहुंचाया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शनकारी को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया.
विरोध क्यों कर रहे थे आदिवासी?
दरअसल, दौधन बांध बनने से पन्ना और छतरपुर के कई गांव प्रभावित होंगे. कई गांव पूरी तरह या आंशिक रूप से डूब क्षेत्र में आ जाएंगे. सबसे ज्यादा असर आदिवासी परिवारों पर पड़ रहा है, जो पीढ़ियों से इन इलाकों में रहते आए हैं.
अप्रैल 2026 शुरू हुई आंदोलन में पहले धरना शुरू हुआ, फिर लोग नदी में उतरकर जल सत्याग्रह करने लगे. इसके बाद आदिवासी महिलाओं ने विरोध का ऐसा तरीका अपनाया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया.
महिलाएं नदी किनारे लकड़ियों से बनी प्रतीकात्मक चिता पर लेट गईं.
क्या है आंदोलनकारियों की मांग?
आंदोलन कर रहे लोगों की मांग है कि उन्हें बाजार दर के हिसाब से उचित मुआवजा दिया जाए. सभी प्रभावित परिवारों का दोबारा सर्वे किया जाए. विस्थापन से पहले रहने के लिए घर और खेती के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए. वन अधिकार कानून के तहत आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और किसी भी परिवार को बिना पुनर्वास के गांव छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए.
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