जोहार लाइव : मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल की चर्चा विगत एक सप्ताह से दिल्ली से देश के आखिरी हिस्से तक चल रही है. मंत्रिमंडल में पहले से शामिल कुछ चेहरे व्याकुल हैं, तो इंतजार कर रहे सांसदों में कुछ शामिल होने के लिए बेचैन. इन सब के बीच सबसे अहम चर्चा है बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार के मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने की चर्चा. इन चर्चाओं के बीच कभी नीतीश और लालू यादव के महत्वपूर्ण सहोयोगी रहे शिवानंद तिवारी नीतीश कुमार को कुछ याद दिला रहे हैं. बकौल शिवानंद तिवारी :-
एक समय ऐसा था जब नीतीश कुमार को नरेंद्र मोदी जी के राजनीतिक विकल्प के रूप में देखा जाता था. अब खबरें आ रही हैं कि वे नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो भारतीय राजनीति का यह एक दिलचस्प मोड़ माना जाएगा.
नीतीश कुमार हमारे पुराने साथी रहे हैं. कभी हम ने साथ-साथ राजनीति की थी. उन दिनों कभी देश की राजनीति की चर्चा होती थी, तो मज़ाक-मज़ाक में मैं उनसे कहता था कि यदि कभी तुम देश के प्रधानमंत्री बने, तो हमारे जैसा आदमी भी तुम्हारे मंत्रिमंडल में गृह मंत्री बनने की संभावना देख सकता है. यह केवल मित्रों के बीच होने वाली हल्की-फुल्की बातचीत थी.
आज विजय चौधरी जी का बयान देखा कि नीतीश कुमार केंद्र सरकार में शामिल हो सकते हैं. यदि ऐसा होता है, तो यह नीतीश जी की लंबी राजनीतिक यात्रा का अंतिम पड़ाव जैसा प्रतीत होता है. जिस व्यक्ति ने पूरे देश में घूम-घूमकर नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाने का अभियान चलाया, वही आज उनके मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने की स्थिति में दिखाई दे रहा है.
महात्मा गांधी ने सात सामाजिक पापों का उल्लेख किया था. उनमें पहला है- “सिद्धांतहीन राजनीति”. यदि पिछले पंद्रह-बीस वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम को देखें, तो यह परिवर्तन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर करता है. एक समय ऐसा था जब नीतीश कुमार नरेंद्र मोदी के साथ एक मंच पर या पोस्टर में अपनी तस्वीर तक नहीं देखना चाहते थे.
भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक 2010 में पटना में हुई थी. कार्यसमिति के सदस्यों को नीतीश जी ने मुख्यमंत्री आवास में भोज का न्योता दिया था. उन दिनों मुख्यमंत्री मोदी जी भी राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य थे. लेकिन वे भी कम खिलाड़ी नहीं हैं. कुछ दिनों पहले बिहार के कोसी नदी का तटबंध टूट जाने के कारण उस इलाक़े में प्रलय जैसी स्थिति पैदा हो गई थी.
कई राज्य सरकारों ने उस गंभीर आपदा से निपटने के लिए बिहार सरकार को आर्थिक सहायता भेजी थी. उनमें गुजरात सरकार भी शामिल थी. मोदी जी ने उस सहायता को पटना में बड़े बड़े होर्डिंग लगवा कर प्रचारित किया. नीतीश जी पिनक गए. उन्होंने गुजरात सरकार की सहायता राशि लौटाने के साथ साथ उसी साँस में राष्ट्रीय कार्यकारिणी के भोज को भी रद्द करने की घोषणा कर दी. कहा जाता है कि उस भोज में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी की संभावित उपस्थिति के कारण ही उन्होंने उस भोज को रद्द कर दिया था.
वहां से शुरू हुई राजनीतिक यात्रा आज इस मुकाम पर पहुंचती दिखाई दे रही है कि वही नीतीश कुमार अब नरेंद्र मोदी का घुटना छू रहे हैं. केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके शामिल होने की चर्चा आजकल केंद्र में हैं. इसलिए यदि ऐसा होता है, तो इसे भारतीय राजनीति की एक बड़ी विडंबना ही कहा जा सकता है.
हमारे और उनके राजनीतिक मतभेद रहे हैं, लेकिन व्यक्तिगत संबंध हमेशा बने रहे हैं. वे हमारे पुराने मित्र हैं. हम उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना करते हैं.
(नोट : जैसा कि शिवानंद तिवारी ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है)
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