जोहार लाइव ब्यूरो
जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा-2023 में कथित पेपर लीक मामले में आरोपी सफल अभ्यर्थी दीपक कुमार की जमानत याचिका का राज्य/सीआईडी की ओर से विरोध किया गया. एडिशनल पी.पी. ने अदालत में कहा कि जांच से ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं, जो प्रथम दृष्टया दीपक कुमार की कथित पेपर लीक व्यवस्था में भागीदारी की ओर इशारा करते हैं. अभियोजन के अनुसार दीपक को परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर वाला मटीरियल उपलब्ध कराया गया था, जिसे उसने याद किया और इसके बाद परीक्षा दी.
अभियोजन के मुताबिक, दीपक कुमार जेएसएससी-सीजीएल-2023 का सफल अभ्यर्थी है और सह-आरोपी उमेश कुमार राय का साला है. सीआईडी का आरोप है कि उमेश राय अभ्यर्थियों को जुटाने और परीक्षा में कथित सेटिंग/गड़बड़ी करने में सक्रिय रूप से शामिल था. जांच में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन ने कहा कि दुग्धा, बोकारो स्थित बीसीसीएल क्वार्टर में कई अभ्यर्थी जुटे थे, जहां परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक प्रश्न-पत्र और उत्तर उपलब्ध कराए गए.
सीआईडी के अनुसार दीपक भी इस क्वार्टर में मौजूद था. आरोप है कि उसने सह-आरोपी रितेश सिंह उर्फ मुन्ना और मिथिलेश सिंह उर्फ आर.के. सिंह से मिले प्रश्न-उत्तर वाले मटीरियल को हासिल किया और याद किया. इसके बाद वह परीक्षा में शामिल हुआ.
अभियोजन ने दीपक के मोबाइल की सीडीआर का भी हवाला दिया. दावा किया गया कि सीडीआर से संबंधित समय में उसके धनबाद में होने और परीक्षा आयोजन स्थल के आसपास उसकी मौजूदगी का पता चलता है. जांच के दौरान प्रश्न-पत्र के वितरण और उसे याद कराने के समय उमेश राय के क्वार्टर पर उसकी मौजूदगी की पुष्टि होने की बात भी कही गई.
चयन के बाद ससुर के खाते में 14 लाख, उमेश राय के खाते में 5 लाख जमा होने का दावा
जमानत का विरोध करते हुए सीआईडी ने वित्तीय जांच का भी हवाला दिया. अभियोजन के अनुसार दीपक के चयन के बाद 22 जनवरी 2026 को उसके ससुर सुरेश राय के खाते में 14 लाख रुपये और सह-आरोपी उमेश राय के खाते में 5 लाख रुपये जमा किए गए.

अभियोजन ने इन लेन-देन को परीक्षा से जुड़े पैसों के लेन-देन संबंधी आरोपों का समर्थन करने वाला वित्तीय साक्ष्य बताया. साथ ही दीपक के मोबाइल फोन के विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा गया कि उसने परीक्षा से पहले और बाद में सह-आरोपी विजय तिवारी, उमेश राय और अन्य अभ्यर्थियों से बातचीत की थी.
सीआईडी ने अदालत में कहा कि उमेश राय के बयान, अन्य लोगों के बयानों तथा इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्यों को एक साथ देखने पर पहली नजर में यह सामने आता है कि दीपक उन अभ्यर्थियों में शामिल था, जिन्हें कथित तौर पर लीक प्रश्न-पत्र मिला और जिन्होंने परीक्षा से पहले उसके उत्तर याद किए. अभियोजन ने इसी आधार पर उसे कथित संगठित तंत्र का लाभार्थी और सहभागी बताया तथा झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों पर नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 की धारा 22 का हवाला देते हुए जमानत खारिज करने की मांग की.
बलियापुर, धनबाद और मखमांड्रो सेंटर की घटनाओं का भी कोर्ट रिकॉर्ड में जिक्र
अदालत ने केस डायरी और दस्तावेजों में दर्ज अभियोजन के मामले का भी संक्षिप्त उल्लेख किया. शिकायतकर्ता राजेश प्रसाद, जो लालपुर स्थित करियर फाउंडेशन कोचिंग सेंटर में शिक्षक हैं, के लिखित बयान के अनुसार जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा 21 और 22 सितंबर 2024 को तीन पालियों में आयोजित हुई थी.
शिकायत के मुताबिक बलियापुर परीक्षा केंद्र पर परीक्षा शुरू होने से पहले एक व्यक्ति मोबाइल पर बात करते हुए कागज पर कुछ लिख रहा था. परीक्षार्थी राम चंद्र मंडल ने उस कागज की तस्वीर अपने मोबाइल में ले ली. धनबाद के कुमार बीएड कॉलेज सेंटर पर भी एक व्यक्ति के मोबाइल पर बात करते हुए कागज पर लिखने और कागज दिखाने को कहे जाने पर उसे फाड़कर भागने की घटना का उल्लेख है. बाद में फटे हुए कागजों को जोड़ने पर उन पर सवालों के जवाब लिखे होने का दावा किया गया.
रातू के मखमंदरो सेंटर की घटना का भी रिकॉर्ड में उल्लेख है, जहां एक परीक्षार्थी के फोन पर बात करने के बाद अखबार पर कुछ लिखने की बात सामने आई. अभियोजन के अनुसार डमरौन, हजारीबाग निवासी आशीष कुमार ने परीक्षा खत्म होने के बाद पाया कि अखबार पर लिखे जवाब परीक्षा में पूछे गए सवालों से मेल खाते थे.
इन घटनाओं के आधार पर परीक्षा के प्रश्न-पत्र के लीक होने की आशंका जताई गई थी. दीपक कुमार से संबंधित सीडीआर, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन को सीआईडी ने इसी कथित पेपर लीक नेटवर्क से जोड़ते हुए उसकी जमानत का विरोध किया है.
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