आनंद दत्त/किसलय शानू
सीजीएल परीक्षा धांधली केस की जांच कर रही एसआईटी की जांच में अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि सीजीएल परीक्षा का पेपर लीक हुआ था. परीक्षा का प्रश्न पत्र छात्रों को देने के बजाय उनसे 20-20 लाख रुपए लेकर एक निश्चित स्थान पर लेकर छात्रों को प्रश्नों के उत्तर रटाए गए थे. एसआईटी की जांच में यह भी स्थापित हुआ है कि पेपर लीक करने का काम मिथिलेश सिंह के गिरोह ने किया था. गिरोह की ओर से कैंडीडेट तलाशने के एवज में एजेंट को पैसे भी दिए गए थे.
उल्लेखनीय है कि जेपीएससी घोटाले में ही जांच के क्रम में पहली बार अभय तिवारी के बयान से सीजीएल परीक्षा पेपर लीक का मामला उजागर हुआ था. जिसके बाद पहले से सीजीएल परीक्षा की जांच कर रही एसआईटी का विस्तार डीजीपी तदाशा मिश्रा की ओर से किया गया था. एसआईटी विस्तार करने के पीछे उद्देश्य था कि पेपर लीक के जरिये पास होनेवाले छात्रों को चिन्हिंत कर कार्रवाई की जाए. एसआईटी ने जांच के क्रम में ऐसे लोगों को चिन्हित करना आरंभ किया जिन्होंने पेपर लीक करने में अपनी भूमिका निभाई थी और ऐसे लोग जो प्रश्नों के उत्तर रट कर परीक्षा पास किए थे.
कैसे अनुराग गुप्ता ने डीजीपी के पद पर रहते हुए फैक्ट्स को किया था नजरअंदाज
डीजीपी के पद पर रहते हुए अनुराग गुप्ता के कार्यकाल के दौरान जांच में यह स्थापित हुआ था कि 28 कैंडीडेट को नेपाल के बीरगंज ले जाया गया था. यहां सभी को एक होटल में ठहराया गया था. बीरगंज में संदीप त्रिपाठी प्रश्नों का उत्तर लेकर होटल पहुंचे और यहां सभी 28 कैंडीडेट को क्वेश्चन का आंसर याद कराया. इन 28 कैंडीडेट में से 10 कैंडीडेट विभूती अमन, दयानंद यादव, नवीन कुमार यादव, अमन कुमार सिंह, दिवाकर कुमार देव, विकास कुमार, अरविंद कुमार, उमेश यादव, उपेंद्र यादव और कृष्णा स्नेही सीजीएल परीक्षा पास किया था. जांच के क्रम में यह भी स्थापित हुआ था कि 135 क्वेश्चन और उनके उत्तर रटवाए गए थे. इसमें से 120 प्रश्न और उसके उत्तर सही पाए गए थे.
केस डायरी में यह सब बात आते हुए इस फैक्ट्स को अनुराग गुप्ता ने नजरअंदाज किया और यह कहते हुए कि आरोपियों के पास से प्रश्न पत्र बरमाद नहीं हुआ है, इसलिए इसे पेपर लीक से नहीं जोड़ा जा सकता है. यह सिर्फ छात्रों को गुमराह कर उनसे पैसा ठगी करने के लिए किया गया था. अगर अनुराग गुप्ता यह मानकर चलते कि प्रश्नपत्र लीक हुआ है, इसी वजह से 120 प्रश्नों के उत्तर सही पाए गए, तो आज से कुछ साल पहले ही सीजीएल केस में पेपर लीक का मामला जांच में सामने आ जाता और फर्जी तरीके से परीक्षा पास करनेवाले लोग नौकरी में नहीं आ पाते.
मीडिया को दिए बयान में तत्कालीन डीजीपी अनुराग गुप्ता ने कहा था कि, एक जमाना था जब लोग कहते थे कि सच की विजय होगी, अब ये जमाना आ गया है कि जब एक झूठ को 100 बार बोलेंगे तो वो सच हो जाता है. सीजीएल परीक्षा की बात नहीं कर रहा हूं, झूठ है कि सच है मैं नहीं कह रहा हूं, ये तो इंवेस्टिगेशन में आयेगा. सीजीएल परीक्षा में लीकेज हुई है कि नहीं हुई है. कुछ दिनों में प्रूफ हो जाएगा.
उन्होंने कहा था कि एक बात पूरी पक्की है कि एक पूरा गैंग, इसमें कोई अपना नाम एक्जाम फाइटर के नाम पर रखा है. कोई कुछ नाम रखे हुए हैं. पूरा गैंग लगा हुआ है इस सीजीएल को प्रमाणित करने के लिए कि ये इसमें गड़बड़ी हुई है. अभी तक जो साक्ष्य मिले हैं, जिसमें कोई साक्ष्य हमारे पास नहीं है कि कोई कह सके कि सीजीएल फर्जी है.
अनुराग गुप्ता ने कहा था कि मेरा कहना है कि अगर आप दावा करते हो कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो आप अपने तथ्यों को प्रमाणित करोगे. हम एक जांच एजेंसी के तौर पर अप्रमाणित करेंगे. मेरा कहने का मतलब है कि जो व्यक्ति आरोप लगाता है कि उसको तथ्य प्रस्तुत करने चाहिए न कि हम एक सीआईडी या पुलिस के तौर पर प्रूफ करें, हमारा काम है आपको डिस्प्रूव करना, लेकिन आपका प्राईमरी वर्क है.
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उन्होंने कहा था कि मैंने पिछली बार बात उठायी थी. उसे पुन: उठाता हूं. जितने अभ्यर्थी हैं, जितने 50-55 लोग हैं अभ्यर्थी में जिसमें से कुछ कोचिंग संस्थान से हैं तो प्रोबलम क्या है. एक परीक्षा में 10 लाख लोग अपियर करेंगे. पास कितने करेंगे 2 हजार, अगर आप पास और फैल कि वोटिंग करा लो तो पास वाला फेल कर जाएगा और फेल हुआ है वो पास कर जाएगा. मेरा कहने का मतलब है कि इस पूरी व्यवस्था में लाखों लोग चाहते हैं कि जो पास नहीं हुए हैं, सब नहीं चाहते, लेकिन अधिकांश चाहते हैं कि परीक्षा रद्द हो जाए. और जो 2 हजार कड़ी मेहनत से सेलेक्ट हुए हैं. उनकी आवाज बहुत छोटी है.
उन्होंने कहा था, “मेरा कहना है कि हमने पेपर में एड निकाले थे कि आप अपने तथ्य हमारे पास रखें. बहुत से लोगों ने हमें तथ्य दिए. लेकिन कौन कर रहा है. अगर आपके पास ऐसा पेपर उपलब्ध है जो परीक्षा शुरू होने से पहले आपके पास आया तो कैसे आया. किसने दिया आपके पास नहीं आया किसी तीसरे व्यक्ति के पास आया तो उसका कोई नाम होगा. कोई मोबाइल फोन होगा. कोई एड्रेस होगा. कोई उसका घर होगा. कोई बैंक एकाउंट होगा. कुछ भी तो नहीं है. न कोई मोबाइल नं. दे रहे हैं. वाट्सएप्प चैट, वाट्सएप्प नं. नहीं है.”
उन्होंने कहा था कि एक स्क्रीन शॉट पेपर मिला, ट्रेन में दो आदमी जा रहे थे. लिख रहा उसका चुपके से फोटो खींच लिये. पेपर की फोटो खीची तो बंदे की फोटो खीच लेते हमें भी थोड़ी सुविधा हो जाती. वो तो आपने किया नहीं.
उन्होंने कहा था कि बड़ी समस्या आ रही है फिर भी हम पूरी एसआईटी के जिम्मे कर दिए हैं. डीआईजी और एसपी लगे हुए हैं. जो मोबाइल फोन उपलब्ध करवाए गए हैं उसकी जांच करवा रहे हैं. जांच के क्रम में तथ्य आयेंगे तो उसके अनुसार कारवाई करेंगे.
मिली जानकारी के मुताबिक सेटिंग कराए गए परीक्षार्थियों को कुल 132 प्रश्नों के उत्तर रटवाए गए थे, जिसमें से कुल 120 प्रश्नों के उत्तर मैच कर गए थे.
हालांकि वर्तमान में भी एसआईटी को जांच के क्रम में प्रश्न पत्र नहीं मिला है लेकिन आरोपियों के बयान और मनी ट्रेल के आधार पर एसआईटी ने माना है कि सीजीएल परीक्षा का पेपर लीक हुआ था.

