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    Home»जोहार ब्रेकिंग»झारखंड : पहली बार बदला बर्खास्तगी का तरीका, NPU VC दिनेश सिंह पर राजभवन ने सरकार को भेजा प्रस्ताव
    जोहार ब्रेकिंग

    झारखंड : पहली बार बदला बर्खास्तगी का तरीका, NPU VC दिनेश सिंह पर राजभवन ने सरकार को भेजा प्रस्ताव

    Muskan ChoudharyBy Muskan ChoudharySeptember 16, 2026Updated:September 16, 2026No Comments4 Mins Read3
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    दिनेश सिंह
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    जोहार लाइव ब्यूरो

    नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय, पलामू के कुलपति डॉ. दिनेश कुमार सिंह पर कार्रवाई का मामला अब बर्खास्तगी की प्रक्रिया तक पहुंच गया है. राज्यपाल सचिवालय की ओर से डॉ. सिंह को कुलपति पद से हटाने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजे जाने की जानकारी सामने आई है. अब सरकार की सहमति के बाद राज्यपाल सचिवालय की ओर से बर्खास्तगी का आदेश जारी किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब विश्वविद्यालय के कामकाज को लेकर विशेष ऑडिट में कई वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है. इससे पहले राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने डॉ. दिनेश कुमार सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी.

    वित्त मंत्री ने राज्यपाल से की थी तत्काल हटाने की मांग

    15 सितंबर को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यपाल से मुलाकात कर डॉ. दिनेश कुमार सिंह को कुलपति पद से तत्काल हटाने की मांग की थी. मंत्री ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर आशंका जताई थी कि कुलपति पद पर बने रहने की स्थिति में कथित अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्यों और दस्तावेजों से छेड़छाड़ हो सकती है.

    मंत्री के मुताबिक, विश्वविद्यालय में हुई अनियमितताओं को लेकर उनके स्तर से पहले भी राज्यपाल को जानकारी दी गई थी. इसके बाद राज्यपाल के निर्देश पर विश्वविद्यालय का विशेष अंकेक्षण कराया गया था. वित्त विभाग की अंकेक्षण रिपोर्ट में कई मामलों में आपत्तियां सामने आने की बात कही गई है.

    ऑडिट में परीक्षा कार्यों में करीब 2.50 करोड़ के भुगतान का उल्लेख

    उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अंकेक्षण में परीक्षा कार्यों के संचालन के मद में करीब 2.50 करोड़ रुपये के अनियमित भुगतान का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में कुलपति की नियुक्ति और बार-बार अवधि विस्तार से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए गए हैं.

    इसके अलावा अक्टूबर 2025 में आयोजित विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सचिवालय से बजट की स्वीकृति के बिना 79.35 लाख रुपये खर्च किए जाने का भी उल्लेख किया गया है. वित्त मंत्री ने राज्यपाल को इन मामलों की जानकारी देने की बात कही है.

    वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर पहले ही लग चुकी है रोक

    विशेष अंकेक्षण और शिकायतों के बाद राज्यपाल सचिवालय ने डॉ. दिनेश कुमार सिंह के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगा दी थी. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें केवल रूटीन कार्यों तक सीमित किए जाने की बात सामने आई थी.

    मामले में एक और विवाद तब सामने आया, जब अधिकारों पर रोक लगाए जाने के बाद कुलपति की ओर से विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार के स्थानांतरण और नए रजिस्ट्रार की नियुक्ति किए जाने का आरोप लगाया गया. वित्त मंत्री ने राज्यपाल से मुलाकात के दौरान इस घटनाक्रम का भी उल्लेख किया था.

    नए विश्वविद्यालय कानून से बदली बर्खास्तगी की प्रक्रिया

    अब इस पूरे मामले में नए विश्वविद्यालय अधिनियम की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नए प्रावधानों के तहत कुलपति को पद से हटाने के मामले में राज्य सरकार की सहमति आवश्यक है. इसलिए राजभवन की ओर से प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने के बाद अब सरकार के निर्णय पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी.

    यानी फिलहाल मामला केवल राजभवन की कार्रवाई तक सीमित नहीं है. सरकार की सहमति मिलने के बाद ही बर्खास्तगी संबंधी आदेश जारी किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

    पहले भी डॉ. दिनेश सिंह को लेकर उठे थे सवाल

    डॉ. दिनेश कुमार सिंह को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आ चुके हैं. जुलाई 2025 में राज्यपाल ने रांची विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति के रूप में उन्हें दिया गया अतिरिक्त प्रभार वापस ले लिया था और उनसे स्पष्टीकरण मांगा था. उस समय भी उनके खिलाफ वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख किया गया था.

    अब नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में विशेष ऑडिट, वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारों पर रोक और वित्त मंत्री की ओर से तत्काल हटाने की मांग के बाद मामला कुलपति पद से हटाने की प्रक्रिया तक पहुंच गया है. हालांकि, अंतिम बर्खास्तगी आदेश सरकार की सहमति और उसके बाद राजभवन की कार्रवाई के बाद ही प्रभावी होगा. 

    Also Read : 17 सितंबर को सुदिव्य कुमार सोनू के श्राद्ध कार्यक्रम को लेकर यातायात व्यवस्था में बदलाव

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