आनंद दत्त/किसलय शानू
उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा धांधली केस में मास्टरमाइंड के रूप में जिस अतुल वत्स का नाम सामने आया था. अब उसका नाम जेपीएससी द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में की गयी धांधली से जुड़ गया है. जेपीएससी केस में अतुल वत्स का नाम सीआईडी की जांच में अब सामने आया है. यह नाम सीआईडी की पूछताछ में मो. एबाद ने लिया.
मो. एबाद मूल रूप से यूपी के रोनाही का रहने वाला है. लेकिन यह सीआईडी की गिरफ्तारी से पहले टीडीपीएल कंपनी में कार्यरत था. इसने पूछताछ में जेपीएससी में जहां एक ओर ओएमआर और ओएसएम में टेंपरिंग की बात स्वीकार की है.
वहीं दूसरी ओर इसने अपने सहयोगियों के रूप में 12 लोगों का नाम लिया है. इसमें सबसे प्रमुख है, बिहार निवासी अतुल वत्स और दूसरा मिथिलेश सिंह.
मिथिलेश सिंह का नाम पहली बार जेपीएससी परीक्षा घोटाले के मास्टरमाइंड अभय तिवारी के स्वीकारोक्ति बयान में सामने आया था. अभय तिवारी के बयान से यह पहली बार यह स्पष्ट हुआ कि सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक हुआ था पेपर लीक कराने का काम वेबेल एजेंसी के मालिक मिथिलेश सिंह और इसके सहयोगियों ने मिलकर किया था.
अभय तिवारी के इस बयान के बाद सीआईडी की जांच की दिशा बदली और जांच में पेपर लीक की बात समाने आने पर अब मिथिलेश सिंह की तलाश तेज कर दी गयी है. लेकिन इस पूरे प्रकरण में अब अतुल वत्स का नाम सबसे चौंकाने वाला है.
तमाड़ में पुलिस ने अतुल वत्स सहित 164 लोगों को किया था गिरफ्तार, क्या हुआ था पेपर लीक
रांची पुलिस ने उत्पाद भर्ती परीक्षा धांधली केस में 12 अप्रैल 2026 को अतुल वत्स सहित 164 लोगों को गिरफ्तार किया था. सभी की गिरफ्तारी तमाड़ थाना क्षेत्र से हुई थी. इस पूरे मामले में आरोपियों के खिलाफ तमाड़ थाना में केस भी दर्ज हुआ था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर यह बताया गया था कि अतुल वत्स गिरोह का सरगना है.
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इसके अलावा चार अन्य लोग शामिल हैं. जबकि 159 लोग परीक्षा सहित अन्य शामिल थे. पुलिस की ओर से यह भी बताया गया था कि अतुल वत्स राजस्थान क्लर्क भर्ती परीक्षा-2017, नीट परीक्षा पेपर लीक 2024, कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भर्ती परीक्षा बिहार 2024, रिव्यू ऑफिसर /सहायक रिव्यू ऑफिसर प्रारंभिक परीक्षा उत्तरप्रदेश 2024 और उत्तर प्रदेश सिपाही भर्ती परीक्षा गड़बड़ी केस 2024 में शामिल रहा था. हालांकि झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा केस में पुलिस की ओर से पेपर लीक का दावा नहीं किया गया था.
पुलिस की ओर से सिर्फ बताया गया था अतुल वत्स सहित उसके गिरोह से जुड़े चार अन्य आरोपी सॉल्वर गैंग हैं और वे ठगी करने के लिए ऐसा कर रहे थे. लेकिन जेपीएससी केस में अतुल वत्स का नाम सामने आने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि अतुल ने उत्पाद भर्ती परीक्षा का पेपर लीक तो नहीं कराया था. क्योंकि अभी जब सीआईडी की जांच में जो बातें सामने आई, उसमें यह स्पष्ट है गिरोह के सदस्य पेपर लीक तो करते थे. लेकिन प्रश्नपत्र कभी छात्रों को नहीं दिया जाता था. बल्कि छात्रों को एक निश्चित स्थान पर ले जाकर उन्हें रटवाया जाता था. अब यह छात्र की किस्मत पर रहता था, वह कितने प्रश्नों का उत्तर याद और कितने परीक्षा के दौरान सही किए.
उत्पाद सिपाही परीक्षा में भी छात्रों के पास से पेपर बरामद हुए थे. जिसमें भी उत्तर लिखे होने की बात सामने आयी थी. इसलिए यहां यह सवाल उठने लगा है कि कहीं उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में भी पेपर लीक कर इसे छात्रों को रटाने के लिए एक जगह एकत्र तो नहीं किया गया था. इस कार्य में अतुल वत्स ने मिथिलेश सिंह का सहयोग तो नहीं लिया था. पुलिस या सीआईडी की जांच पूरी होने के बाद इस मामले का खुलासा हो सकता है.
मो एमाद के सहयोगियों में अतुल वत्स और मिथिलेश सहित 12 लोगों के नाम
मो. एबाद ने अपने सहयोगियों के रूप में अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह सहित 12 लोगों का नाम लिया है. अन्य सहयोगियों में रामबीर सिंह, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्रम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और मो. उस्मान का नाम शामिल है.
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