झारखंड आंदोलनकारी अधिकार मंच की केंद्रीय समिति ने खान-खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. मंच ने गुरुवार 3 सितंबर को पुराना विधानसभा सभागार के विधायक क्लब में खान-खनिज विधेयक के खिलाफ बृहद मंथन बैठक की थी. आंदोलनकारियों ने विधेयक को झारखंड के हितों के लिए घातक बताते हुए कहा कि राज्य के खनिज संसाधनों पर झारखंड के हितों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आंदोलनकारियों ने नारा दिया – खनिज हमारा, कानून तुम्हारा नहीं चलेगा.
बैठक में आंदोलनकारियों ने केंद्र सरकार पर झारखंड के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि झारखंड विरोधी कानून थोपने का प्रयास हुआ तो अलग राज्य आंदोलन की तर्ज पर आर्थिक नाकेबंदी का रास्ता अपनाया जा सकता है.
वक्ताओं ने कहा कि कंपनी राज और महाजनी प्रथा के खिलाफ झारखंड का इतिहास संघर्ष का रहा है. कॉरपोरेट कंपनियों के हित में झारखंड विरोधी और आदिवासी विरोधी कानून लागू किए गए तो राज्य में फिर उलगुलान के नगाड़े बजेंगे.
आंदोलनकारियों ने सरकार से मांगा न्याय
बैठक में राज्य सरकार की आंदोलनकारी पेंशन नीति पर भी सवाल उठाए गए. आंदोलनकारियों ने पूछा कि जब जेल जाने वाले आंदोलनकारियों को पेंशन दी जा रही है तो जमानत पर बाहर रहने वाले आंदोलनकारियों को इसका लाभ क्यों नहीं मिलना चाहिए.
मंच ने मांग की कि जेल नहीं जाने वाले लेकिन आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे सभी आंदोलनकारियों को भी पेंशन राशि के साथ सम्मान दिया जाए. वक्ताओं ने कहा कि केवल आंदोलनकारी कार्ड जारी करने से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं होगी.
आंदोलनकारियों ने कहा कि अधिकांश आंदोलनकारी अब बुजुर्ग और बीमार हो चुके हैं. इसलिए गुरुजी मेडिकल कार्ड जारी कर सभी आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुविधा देने की मांग की गई. इसके अलावा क्षैतिज आरक्षण के बजाय आंदोलनकारियों के आश्रितों को सीधी नियुक्ति की गारंटी देने की मांग भी उठी.
अक्टूबर में महाधिवेशन, 15 नवंबर के बाद आंदोलन
बैठक में जिला स्तर की कमेटियों को मजबूत करने और अक्टूबर में केंद्रीय महाधिवेशन आयोजित करने का निर्णय लिया गया. साथ ही 15 नवंबर के बाद खान-खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ जोरदार आंदोलन शुरू करने का फैसला हुआ.
बैठक में रांची, खूंटी, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, लातेहार, लोहरदगा, पलामू, दुमका और देवघर समेत कई जिलों से सैकड़ों आंदोलनकारी शामिल हुए. शुरुआत झारखंड के चर्चित आंदोलनकारी दामु बनरा समेत दर्जनों आंदोलनकारियों और नेपाल त्रासदी में मारे गए लोगों को एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई.
बैठक की अध्यक्षता पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल के सोहराई किस्कू, प्रवीण मेहता, अनिल मनोहर, बदरी सिंह और सुनीता मिंज ने की. संचालन स्टीफन किंडो और सुबोध लकड़ा ने संयुक्त रूप से किया. भुवनेश्वर केवट, जितेंद्र कुशवाहा, ललित महतो, रमेश साहू, सीताराम उरांव, अली हुसैन अंसारी, दिनेश राम, अशोक गुप्ता, भुनेश्वर दास, जावेद इस्लाम, विजय सिंह, विन्सेंट सांगा, राजेंद्र ठाकुर, अनिता मिंज, सुनीता मिंज, रसका टुडू और मारकुस केरकेट्टा समेत अन्य ने बैठक को संबोधित किया.
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