दिवाली पर पटाखे जलाने और उससे होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम बात कही है. अदालत का कहना है कि पटाखों से मुक्त दिवाली सिर्फ सरकार या कोर्ट की पहल नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे लोगों का आंदोलन बनाना होगा. इसके लिए केवल आदेश जारी करने से काम नहीं चलेगा, आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी.
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बार-बार आदेश जारी करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा. कई बार जितने ज्यादा आदेश दिए जाते हैं, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ जाती है.
अदालत ने दिल्ली सरकार और संबंधित अधिकारियों से कहा कि इस अभियान में स्थानीय पार्षदों को भी शामिल किया जाए. पार्षद अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों से अपील करें कि दिवाली और दूसरे त्योहारों पर ऐसे पटाखों से दूरी बनाएं, जो प्रदूषण बढ़ाते हैं.
हर घर के बाहर पुलिस तैनात नहीं कर सकते
सुनवाई के दौरान अदालत की सहायता कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि पटाखों पर प्रतिबंध लागू कराना आसान नहीं है. सरकार हर घर के बाहर पुलिसकर्मी तैनात नहीं कर सकती. इसके लिए लोगों का सहयोग जरूरी है.
उन्होंने ग्रीन पटाखों की बिक्री में गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया. बताया कि कुछ दुकानदार बाहर ग्रीन पटाखों के डिब्बे दिखाते हैं, लेकिन अंदर कथित तौर पर प्रतिबंधित पारंपरिक पटाखे भी बेचे जा रहे हैं.
अपराजिता सिंह ने बच्चों की सेहत पर प्रदूषण के असर को लेकर चिंता जताई. उन्होंने CPCB की 2012 की एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली के 43.5 प्रतिशत स्कूली बच्चों में राजधानी से बाहर के बच्चों की तुलना में फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी पाई गई थी.
दिवाली रोशनी का त्योहार है, धुएं का नहीं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दिवाली का मूल स्वरूप रोशनी का त्योहार है. इसे धुएं और प्रदूषण से जोड़ने की जरूरत नहीं है. लोगों को त्योहार मनाने के पारंपरिक तरीकों की ओर लौटने पर विचार करना चाहिए.
अदालत ने त्योहारों में बढ़ते व्यावसायीकरण पर भी टिप्पणी की. पीठ ने कहा कि उपहारों का आदान-प्रदान अब कई बार सामाजिक प्रतिष्ठा दिखाने का जरिया बनता जा रहा है. इससे अनावश्यक खर्च और कचरा बढ़ता है. अदालत ने अधिक खपत करने वाले वर्गों के पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया.
सुनवाई में दिल्ली की बिगड़ती हवा पर भी चिंता जताई गई. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि प्रदूषण को लेकर लगातार बैठकें और घोषणाएं होती हैं, लेकिन दिल्ली का AQI 400 तक पहुंच रहा है.
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