रांची। झारखंड में अब अवैध तरीके से ईंट मिट्टी का खनन कर ईंट बनाना महंगा पड़ेगा. राज्य सरकार ने ईंट मिट्टी के अवैध खनन, भंडारण और परिवहन पर जुर्माने का प्रावधान सख्त कर दिया है. नई व्यवस्था के तहत बिना वैध अनुमति ईंट मिट्टी निकालने या उसका इस्तेमाल करने वाले ईंट-भट्ठा मालिकों से निर्धारित स्वामित्व राशि (रॉयल्टी) का 10 गुना जुर्माना वसूला जाएगा.
खान एवं भूतत्व विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को झारखंड लघु खनिज समनुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 की अधिसूचना जारी की है. गजट में प्रकाशन की तारीख से ही यह नियमावली प्रभावी हो गई है.
बिना अनुमति मिट्टी निकालने पर 10 गुना जुर्माना
संशोधित नियमावली के तहत कोई व्यक्ति या उसकी ओर से काम करने वाला एजेंट, मैनेजर, कर्मचारी अथवा ठेकेदार बिना वैध पट्टा, अनुज्ञप्ति या अन्य अनुमति के ईंट मिट्टी का खनन और निकासी नहीं कर सकेगा. इसके अलावा बिना वैध अनुज्ञप्ति या चालान के मिट्टी का भंडारण और परिवहन भी नियमों के दायरे में आएगा.
नियम के अनुसार, यदि ईंट मिट्टी निकालने वाला व्यक्ति या ईंट-भट्ठा मालिक निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वामित्व की समेकित राशि का पूरा भुगतान कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में विफल रहता है, तो उसे अनुसूची-3 में निर्धारित ईंट मिट्टी की स्वामित्व राशि का 10 गुना जुर्माना देना होगा.
सरकारी निर्माण में खनिज इस्तेमाल पर भी सख्ती
सरकार ने सरकारी निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले लघु खनिजों की खरीद को लेकर भी जवाबदेही तय की है. नए नियम के तहत सरकारी कार्य विभागों, सरकारी कंपनियों, निगमों, उपक्रमों और स्वायत्त सरकारी निकायों के साथ उनके ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण में इस्तेमाल होने वाला खनिज वैध खनन पट्टाधारक या अनुज्ञप्तिधारी से खरीदा गया हो. इसके लिए वैध चालान होना अनिवार्य होगा.
यदि बिना वैध चालान या अनुमति के खनिज का इस्तेमाल अथवा आपूर्ति की जाती है, तो संबंधित पक्ष को खनिज मूल्य और स्वामित्व राशि के दोगुने के बराबर जुर्माना देना होगा. इसके अलावा DMF, मैनेजमेंट शुल्क, पर्यावरणीय सेस और आयकर के बराबर राशि भी जमा करनी होगी.
पुराने मामलों के लिए अलग गणना
संशोधन में नियमावली लागू होने से पहले इस्तेमाल या आपूर्ति किए गए खनिजों के मामलों में जुर्माने की अलग गणना तय की गई है. ऐसे मामलों में स्वामित्व राशि के दोगुने के साथ DMF, मैनेजमेंट शुल्क, पर्यावरणीय सेस और आयकर की राशि भी जोड़ी जाएगी.
वहीं, नियमावली को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जिन प्रक्रियाओं और दिशा-निर्देशों का उल्लेख नहीं है, उन्हें निर्धारित करने का अधिकार खान निदेशक को दिया गया है.
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