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    Home»JPSC / JSSC»जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : जिस एजेंसी को जेपीएससी एग्जाम का काम ही नहीं मिला, उसने कंडक्ट करा दिए 10 एग्जाम
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    जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : जिस एजेंसी को जेपीएससी एग्जाम का काम ही नहीं मिला, उसने कंडक्ट करा दिए 10 एग्जाम

    joharlive NetworkBy joharlive NetworkSeptember 2, 2026No Comments4 Mins Read19
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    आनंद दत्त/किसलय शानू

    झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (जेपीएससी) गड़बड़ियों का मकड़जाल हर दिन उलझता ही जा रहा है. नए खुलासे के मुताबिक जिस एजेंसी का सीधे तौर पर जेपीएससी से कोई लेना-देना नहीं था, जिसे किसी तरह का कोई काम नहीं दिया गया, उसी ने परीक्षा करा दिए.

    जेपीएससी में हुई कथित गड़बड़ियों के मामले में बीते 22 जुलाई को मो. उस्मान नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद सीआईडी ने उससे गहन पूछताछ शुरू की. उस्मान ने सीआईडी के सामने कई अहम खुलासे किए हैं.

    जिसमें उसने साफ स्वीकारा है कि उसकी कंपनी पिकर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को जेपीएससी से किसी तरह का कोई काम नहीं मिला था, लेकिन उसने जेपीएससी कंबाइंड एग्जाम, जेपीएससी रेग्युलर और बैकलॉग 2025, बैकलॉग 2023, ड्रग इंस्पेक्टर, एपीपी रेग्युलर और बैकलॉग के ओटीआर और एडमिट कार्ड जेनरेशन का काम किया था.

    यही नहीं, ये सब काम बिना किसी लिखित एग्रीमेंट के किया गया. केवल मौखिक एग्रीमेंट हुआ और काम करने लगा.

    उस्मान ने अपने बयान में साफ कहा है कि रामवीर सिंह से उपरोक्त कार्य बिना कोई लिखित एग्रीमेंट के लिया था. मेरे पास परीक्षा कंडक्ट कराने संबंधित कोई भी वैधानिक अधिकार नहीं था. मैंने कई बार रामवीर सिंह से एग्रीमेंट के लिए आग्रह किया, लेकिन हर बार वो टाल-मटोल करते रहे.

    मुझे मालूम था कि टीडीपीएल के निदेशक और जेपीएससी के पदाधिकारियों द्वारा रिजल्ट में गड़बड़ी किया जा रहा है. मैं चुप इसलिए रहा, कि रामवीर सिंह ने मुझे प्रलोभन दिया था कि जो भी बिल का भुगतान होगा, उसमें 20 प्रतिशत कमीशन मेरी कंपनी पिकर प्राइवेट लिमिटेड को दिया जाएगा.

    20 प्रतिशत कमीशन की बात पर चल रहा था फर्जीवाड़ा

    सीआईडी के सामने मो. उस्मान ने पूरा घटनाक्रम विस्तार से बताया है. उसने बताया, साल 2020 में टीडीपीएल के लिए मैंने यूपी विधानसभा बहाली के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया था. इसके बाद रामवीर सिंह से कोई संपर्क नहीं था. फिर जून 2025 में टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने लखनऊ स्थित अपने ऑफिस में मुझे और मेरे साथी हेमंत वर्मा को मिलने के लिए बुलाया. जहां उन्होंने बताया कि जेपीएससी एग्जाम का पोर्टल बनवाना है.

    बातचीत में यह भी तय हुआ कि मेरी कंपनी पिकर प्रा. लि के पांच स्टाफ रांची जाएंगे. जहां उनके जाने, रहने, खाने का खर्च टीडीपीएल वहन करेगी. इसके अलावा प्रति स्टाफ 1 लाख रुपए मासिक खर्च वेतन के मद में देने पर सहमति बनी और हम सब 16 जून 2025 को रांची आ गए. बातचीत में यह भी तय हुआ था कि अगर किसी कस्टमाइज सॉफ्टवेयर की जरूरत पड़ी, तो वो भी बनवाया जाएगा.

    वो आगे बताता है, मैंने टीडीपीएल के कहे अनुसार जेपीएससी द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देश, प्रश्नपत्र की छपाई के लिए हैदराबाद स्थित हाईटेक प्रिंटिंग एजेंसी को ईमेल के माध्यम से भेजा था, साथ ही उसके मैनेजर को व्हाट्सएप पर भी भेजा था. इसके अलावा प्रिंटिंग प्रेस से आए शील्ड पेपर को रांची ट्रेजरी में जमा कराया था.

    ऊपरोक्त परीक्षाओं के अलावा एफआरओ पीटी, एसीएफ पीटी, एपीपी बैकलॉग पीटी, एपीपी रेग्युलर पीटी, एफआरओ मेंस, एसीएफ मेंस के प्रश्नपत्र एवं दिशा-निर्देश भी मैंने टीडीपीएल कंपनी के कहे अनुसार हैदराबाद के उसी कंपनी को ईमेल और व्हाट्सएप से भेजा था. शील्ड प्रश्नपत्र को टीडीपीएल एवं जेपीएससी, दोनों के कहने पर ट्रेजरी में रिसिव कराया था.

    उस्मान ने एक और अहम खुलासा किया है. सीआईडी को उसने बताया, मैं टीडीपीएल का कर्मचारी रहते हुए, पिकर टेक्नोलॉजी, जिसका मैं डायरेक्टर था, की ओर से टेंडर में प्राइस बढ़ाकर सपोर्टिंग दस्तावेज बनाकर रामवीर सिंह के कहने पर दिया था. इसको ऐसे समझिये, जो टेंडर टीडीपीएल को 50 रुपए का मिल सकता था, उसके लिए पिकर ने 100 रुपए का बिड किया होगा. जिसके बाद टीडीपीएल ने उसे 80 रुपए के टर्म पर हासिल कर लिया.

    उस्मान ने बताया, इन सब काम के बदले रामवीर सिंह मेरे पीएनबी और एचडीएफसी बैंक खाते में पैसा भेजता था. हालांकि अधिकतर राशि नगद ही दिया जाता था. रामवीर सिंह के कहने पर अभय तिवारी ने दो बार मेरे पीएनबी बैंक अकाउंट में 25 लाख रुपए ट्रांसफर किए.

    क्या है पिकर टेक्नोलॉजी प्रा.लि

    PICAR Technologies Private Limited उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित एक निजी आईटी/सॉफ्टवेयर कंपनी है. कंपनी की वेबसाइट के अनुसार वह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, आईटी सेवाओं और तकनीकी समाधान उपलब्ध कराने का काम करती है. 7 मार्च 2017 को बनी इस कंपनी में मो. उस्मान के अलावा हेमंत कुमार वर्मा और मो. नासिर भी निदेशक हैं.

    Also Read : जोहार लाइव एक्सक्लूसिव : पेपर लीक कराने के लिए धर्मेंद्र ने बनाया था दबाव, कहा- पेपर लीक करो, नहीं तो झारखंड से बाहर फेंकवा देंगे

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