New Delhi : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। हालांकि, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।
राम रहीम बरी, सबूत नहीं मिले
हाईकोर्ट ने कहा कि इस हत्याकांड में राम रहीम के साजिशकर्ता होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं, इसलिए उन्हें बरी किया गया। इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट ने राम रहीम समेत सभी दोषियों को 7 साल कैद की सजा सुनाई थी। उन्होंने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
बाकी आरोपियों की सजा बरकरार
कोर्ट ने कहा कि कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल के खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाहों की तस्दीक उनकी भूमिका स्पष्ट करती है। इसी आधार पर उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है।
राम रहीम की जेल की स्थिति
राम रहीम इससे पहले डेरा मैनेजर रणजीत हत्याकांड में भी हाईकोर्ट से बरी हो चुके हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट में CBI ने इस फैसले को चुनौती दी है। इसके अलावा, राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण मामले में 10 साल की कैद की सजा मिली है, इसलिए वह अभी जेल में ही रहेंगे।
2002 में हुई थी हत्या
2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े गंभीर आरोप प्रकाशित किए थे। इसके कुछ ही समय बाद उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद CBI को मामले की जांच सौंपा गया। CBI की स्पेशल कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद राम रहीम और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ सभी दोषियों ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
हाईकोर्ट ने सबूतों को नाकाफी बताया
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राम रहीम के खिलाफ सबूत और गवाह पर्याप्त नहीं थे, जबकि कुलदीप, निर्मल और कृष्ण लाल की भूमिका साबित होती है। इसलिए उनकी सजा बरकरार रखी गई।
Also Read : घूस लेते इंजीनियर पर CBI का छापा, 50 हजार रुपये के साथ पकड़े गए


