संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है. गुरुवार को सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर हुई कांग्रेस संसदीय दल (CPP) की बैठक में पार्टी नेताओं ने तय किया कि इस बार संसद में सरकार को कई बड़े मुद्दों पर घेरा जाएगा. बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे.
इन मुद्दों पर सरकार से मांगा जाएगा जवाब
बैठक में फैसला हुआ कि कांग्रेस संसद के दोनों सदनों में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं, आर्थिक हालात, सामाजिक न्याय, पेपर लीक, भ्रष्टाचार, विदेश नीति और ई-20 (इथेनॉल) नीति जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाएगी. पार्टी का कहना है कि इन मामलों में सरकार को सदन के भीतर जवाब देना होगा. इसके अलावा अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई गई.
विपक्षी दलों के साथ मिलकर बनेगी रणनीति
बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाया जाएगा ताकि सरकार को साझा रणनीति के तहत घेरा जा सके. कांग्रेस नेतृत्व ने विभिन्न विपक्षी दलों से लगातार संपर्क बनाए रखने और सदन के अंदर एकजुट होकर मुद्दे उठाने का फैसला किया. साथ ही सरकार की ओर से लाए जाने वाले विधेयकों पर भी स्थिति के अनुसार रणनीति तय की जाएगी.
20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस अब पूरी तरह तैयारी के मोड में है. पार्टी का मानना है कि जनता से जुड़े मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाकर सरकार को जवाब देने के लिए मजबूर किया जाएगा. वहीं सत्र शुरू होने से पहले 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में भी कांग्रेस अपने रुख को स्पष्ट करेगी.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है. एक ओर सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, तो दूसरी ओर विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर लगातार सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति पर काम करेगा. ऐसे में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है.
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