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    Home»क्राइम»सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर रेप का केस करती है झारखंड की पुलिस
    क्राइम

    सादे कागज पर हस्ताक्षर लेकर रेप का केस करती है झारखंड की पुलिस

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 16, 2026Updated:July 16, 2026No Comments4 Mins Read10
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    Police (Representative Image)
    Police (Representative Image)
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    ये पब्लिक है, सब जानती है. लेकिन ये झारखंड पुलिस है, कुछ ज्यादा ही जानती है. वो, जो नहीं हुआ है, उसे तो और बेहतर तरीके से जानती है. इस बात को ऐसे समझिये, जो रेप का आरोपी नहीं था, वो रेप के आरोप में जेल चला जाता है. उसकी सामाजिक बेज्जती होती है, लेकिन आरोप गलत होने पर यही पुलिस खी-खी करते हुए पैंट झारती है और आगे चल देती है.

    दरअसल, खलारी थाना क्षेत्र निवासी एक नाबालिग लड़की का 19 मार्च 2026 को न ही अपहरण हुआ था और न ही उसके साथ दुष्कर्म हुआ था. बल्कि पुलिस ने सादे कागज पर नाबालिग का हस्ताक्षर लेकर नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म के आरोप में तपेश्वर कुमार यादव पर केस दर्ज किया था.

    यह केस खलारी थाना में 23 मार्च 2026 को दर्ज हुआ था. पुलिस ने मजिस्ट्रेट के पास नाबालिग का बयान भी दर्ज कराया था. जिसमें भी नाबालिग ने घटना की पुष्टि हुई थी. लेकिन न्यायालय में जब केस का ट्रायल आरंभ हुआ. तब नाबालिग का बयान रिकॉर्ड किया गया. जिसमें अब जाकर नाबालिग ने कहा है कि मेरे साथ कोई घटना नहीं हुई थी.

    उसका कहना है कि वो आरोपी तपेश्वर यादव को नहीं जानती है और न ही पहचानती है. नाबालिग ने क्रॉस एक्जामिनेशन के दौरान कहा, ‘’पुलिस ने मेरा हस्ताक्षर एक सादे कागज पर लिया था. इसके बाद पुलिस ने कागज में क्या लिखा, मैं इसके इसके बारे नहीं जानती हूं.’’

    नाबालिग की एक बहन ने कहा, ‘’पुलिस ने सिर्फ मेरा नाम- पता पूछा था, इसके अलावा मैं कुछ नहीं जानती हूं. केस में नाबालिग की दूसरी बहन ने कहा कि पुलिस ने मुझसे कुछ नहीं पूछा था, मेरी बहन के साथ कोई घटना नहीं हुई थी.’’

    क्या था आरोप

    खलारी थाना में 23 मार्च 2026 को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि 19 मार्च 2026 को दोपहर करीब दो बजे आरोपी ने नाबालिग को जबरन एक चार पहिया वाहन में बैठाकर अपने क्वार्टर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया. अगले दिन उसे छोड़ते समय किसी को घटना नहीं बताने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद आरोप को सही पाते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था.

    मामले की सुनवाई के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता ने अदालत में अपने ही आरोपों से इनकार कर दिया. बतौर अभियोजन गवाह (पीडब्ल्यू-1) उसने कहा कि उसके साथ कोई घटना नहीं हुई थी. उसने अदालत में आरोपी की पहचान करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि वह उसे नहीं जानती. पीड़िता ने यह भी बयान दिया कि पुलिस ने उससे सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए थे. उसने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया गया उसका बयान पुलिस के कहने पर दर्ज कराया गया था.

    पीड़िता की बड़ी बहन और दूसरी बहन ने भी अदालत में अभियोजन का साथ नहीं दिया. दोनों ने स्पष्ट कहा कि पीड़िता के साथ कोई घटना नहीं हुई थी. हालांकि बड़ी बहन ने आरोपी को पहचानने की बात कही, लेकिन उसने भी कहा कि ऐसा कोई अपराध नहीं हुआ और वे इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते. दोनों बहनों को भी अदालत ने अभियोजन के अनुरोध पर शत्रुतापूर्ण (होस्टाइल) घोषित कर दिया.

    सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने दलील दी कि पीड़िता ने एफआईआर और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने पहले के बयान में आरोपी पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, इसलिए अभियोजन का मामला पूरी तरह झूठा नहीं माना जा सकता. वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब स्वयं पीड़िता ने अदालत में घटना से इनकार कर दिया और आरोपी की पहचान भी नहीं की, तब अभियोजन का मामला साबित नहीं माना जा सकता.

    केस में कब- कब क्या हुआ था

    • 19 मार्च 2026: घटना की तिथि.
    • 23 मार्च 2026:खेलारी थाना में केस दर्ज हुआ.
    • 30 अप्रैल 2026:केस में चार्जशीट हुआ.
    • 17 जून 2026:केस में न्यायालय में चार्जफ्रेम हुआ.
    • 02 जुलाई 2026:केस में साक्ष्रय का परीक्षण हुआ.
    • 13 जुलाई 2026: केस में जजमेंट आया.

    Also Read : दुमका पुलिस का ऑपरेशन सफल, ब्राउन शुगर के साथ तीन आरोपी दबोचे गए

    Fir खलारी खलारी थाना झारखंड पुलिस
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