Johar Live Desk : उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग में गुप्त नवरात्र की शुरुआत आज यानी सोमवार से हो रही है। गुप्त नवरात्र आज कलश स्थापना के साथ शुरू होकर 28 जनवरी बुधवार को विजयादशमी के साथ संपन्न होगा। इस दौरान घरों और मंदिरों में कलश की स्थापना कर मां शक्ति की उपासना की जाएगी।
गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना का महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा ने बताया कि गुप्त नवरात्र में तंत्र साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन और योग साधना के माध्यम से अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। तंत्र और शक्ति उपासना करने वाले साधक इस काल को बहुत सिद्धिदायी मानते हैं। मां वैष्णो देवी, पराम्बा देवी, हिंगलाज देवी और कामाख्या देवी की उपासना का इस नवरात्र में विशेष महत्व है।
दस महाविद्याओं की होगी साधना
माघ मास के गुप्त नवरात्र में दस महाविद्याओं की साधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, माता बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं। यह नवरात्र तंत्र साधना और शक्ति उपासना से जुड़े साधकों के लिए खास माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान के साथ व्रत और साधना करते हैं।
दुर्गा पाठ से मिलेगा लाभ
पंडित राकेश झा के अनुसार, गुप्त नवरात्र में बनने वाले सिद्धिदायी योग में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है। नवरात्र के दौरान दुर्गा सप्तशती, देवी मंत्रों का जाप, दुर्गा कवच और दुर्गा शतनाम का नियमित पाठ करने से रोग और शोक से मुक्ति मिलती है। साथ ही व्यवसाय में वृद्धि, रोजगार और स्वास्थ्य से जुड़ी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी देवी की आराधना की जाती है।
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