New Delhi : सरकार ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर बड़ा फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने उनकी हिरासत को खत्म करते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था, लेकिन अब सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद वांगचुक की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी सुनवाई
इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया में भी सुनवाई चल रही थी। कोर्ट ने कहा था कि वह वांगचुक के भाषणों से जुड़े वीडियो इस सप्ताह देखेगा और उनकी हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर 17 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगा। यह याचिका उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने दाखिल की थी। अदालत की पीठ में अरविंद कुमार और पी. बी. वराले शामिल थे। कोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया था कि जजों के लिए वांगचुक के भाषणों के वीडियो की स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि पूरे मामले को समझकर अंतिम फैसला लिया जा सके।
वकीलों के बीच भी हुई बहस
सुनवाई के दौरान केंद्र और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरलके. एम. नटराज पेश हुए। उन्होंने कहा कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की तबीयत खराब होने के कारण सुनवाई टालने की मांग की गई थी। वहीं, वांगचुक की पत्नी की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि बार-बार सुनवाई टलने से देश में गलत संदेश जा रहा है। इसके बाद अदालत ने साफ किया कि अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी और उसी दिन अंतिम सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया जाएगा।
सरकार ने लगाए थे गंभीर आरोप
सरकार और लद्दाख प्रशासन की ओर से अदालत को बताया गया था कि वांगचुक को पिछले साल लेह में हुई हिंसा के मामले में हिरासत में लिया गया था। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी और करीब 161 लोग घायल हुए थे। प्रशासन का कहना था कि वांगचुक ने सीमावर्ती इलाके में लोगों को भड़काने वाले बयान दिए थे, जिसकी वजह से उन्हें रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था।
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