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    Home»जोहार ब्रेकिंग»अब सिर्फ ISRO नहीं… प्राइवेट कंपनी ने भी अंतरिक्ष में उड़ाया भारत का रॉकेट
    जोहार ब्रेकिंग

    अब सिर्फ ISRO नहीं… प्राइवेट कंपनी ने भी अंतरिक्ष में उड़ाया भारत का रॉकेट

    Joharlive NetworkBy Joharlive NetworkJuly 18, 2026Updated:July 18, 2026No Comments3 Mins Read4
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    भारत के स्पेस सेक्टर के लिए आज बड़ा दिन है. हैदराबाद की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने अपने पहले ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर इतिहास रच दिया. इसके साथ ही भारत पहली बार उस देशों के क्लब में शामिल हो गया, जहां किसी निजी कंपनी ने अपना ऑर्बिटल रॉकेट अंतरिक्ष में भेजा है.

    यह लॉन्च श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से किया गया. लॉन्च के कुछ ही मिनटों बाद विक्रम-1 ने अपने पेलोड को सफलतापूर्वक लो अर्थ ऑर्बिट में स्थापित कर दिया.

    प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

    सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम से फोन पर बात कर उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल एक रॉकेट लॉन्च नहीं, बल्कि देश के युवाओं के लिए नई प्रेरणा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि जब निजी क्षेत्र के लिए स्पेस सेक्टर खोला गया था, तब कई तरह की शंकाएं जताई गई थीं, लेकिन विक्रम-1 की सफलता ने उस फैसले को मजबूती दी है.

    आखिर विक्रम-1 में क्या है खास?

    विक्रम-1 को खास तौर पर छोटे सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए तैयार किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे बहुत कम समय में लॉन्च के लिए तैयार किया जा सकता है. जहां दूसरे रॉकेटों को तैयार करने में कई दिन लगते हैं, वहीं विक्रम-1 को कुछ ही घंटों में असेंबल किया जा सकता है.
    रॉकेट की बॉडी कार्बन फाइबर कंपोजिट से बनी है. इससे यह हल्का भी है और मजबूत भी. हल्का होने की वजह से कम ईंधन में बेहतर प्रदर्शन करता है. इसके इंजन में 3D प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इससे इंजन कम समय और कम लागत में तैयार किया जा सकता है.

    आम लोगों के लिए इसका क्या मतलब?

    आज दुनिया भर में छोटे सैटेलाइट लॉन्च कराने की मांग तेजी से बढ़ रही है. लेकिन लॉन्च के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. विक्रम-1 इस समस्या का समाधान बन सकता है. यह रॉकेट करीब 300 से 350 किलो तक के छोटे सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाने में सक्षम है. आसान भाषा में कहें तो जैसे जरूरत पड़ने पर कैब बुक करते हैं, उसी तरह कंपनियां जरूरत के हिसाब से अपने छोटे सैटेलाइट लॉन्च करा सकेंगी.

    एक नजर में विक्रम-1

    • इसे हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने बनाया है.
    • रॉकेट का नाम डॉ. विक्रम साराभाई के सम्मान में रखा गया है.
    • यह भारत का पहला सफल प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट है.
    • इसका मकसद छोटे सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाना है.
    • इसमें कार्बन फाइबर स्ट्रक्चर और 3D प्रिंटेड इंजन का इस्तेमाल किया गया है.
    • इस मिशन में ISRO ने भी तकनीकी सहयोग दिया.

    विक्रम-1 की सफलता सिर्फ एक रॉकेट लॉन्च नहीं है. यह भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए नए दौर की शुरुआत है. अब तक अंतरिक्ष मिशनों में ISRO सबसे आगे था, लेकिन अब भारतीय निजी कंपनियां भी दुनिया के कमर्शियल स्पेस मार्केट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं. यह उपलब्धि भारत को ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में नई पहचान दिलाने वाली मानी जा रही है.

    Also Read : 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों ने छोड़ा ISRO, क्या खतरे में पड़ जाएगा गगनयान मिशन ?

    डॉ. विक्रम साराभाई रॉकेट विक्रम-1 श्रीहरिकोटा सतीश धवन स्पेस सेंटर सैटेलाइट लॉन्च स्काईरूट एयरोस्पेस
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