दुमका में शनिवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब वन विभाग की टीम पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के पूर्व निजी सचिव विवेक राउत के महुआडंगाल स्थित घर पहुंची. टीम के साथ झारखंड पुलिस भी मौजूद थी. छापेमारी की खबर फैलते ही आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर जुट गए और कार्रवाई का कारण पूछते हुए विरोध करने लगे.
बाद में दुमका के डीएफओ सात्विक ने पूरे मामले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई विवेक राउत के भतीजे पंकज राउत की गिरफ्तारी के लिए की गई थी. पंकज राउत के खिलाफ वन विभाग का एक मामला दर्ज है और उसी केस में उसे गिरफ्तार करने टीम गई थी. हालांकि, वह घर पर नहीं मिला.
रोक के बावजूद चल रही थी मिल
डीएफओ के मुताबिक, 13 जून 2025 को वन विभाग के द्वारा कंपनी पर रोक लगी थी. इसको लेकर सूचना मिली थी कि रोक के बावजूद लालजी पटेल एंड कंपनी सॉ मिल का संचालन किया जा रहा है. सूचना के आधार पर वन विभाग ने छापेमारी की थी. उस दौरान पंकज राउत और मिल संचालक जयपाल राउत पर वनकर्मियों के साथ अभद्रता करने और सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप लगा था. जांच के बाद दोनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई और उन्हें नामजद आरोपी बनाया गया. उसी मामले में गिरफ्तारी के लिए शनिवार को टीम पहुंची थी.
इधर, जैसे ही वन विभाग की टीम विवेक राउत के घर पहुंची, स्थानीय लोग और दुमका जिला परिषद सदस्य चिंता देवी भी मौके पर पहुंच गईं. लोगों ने घर के बाहर विरोध करते हुए कहा कि पहले कार्रवाई की वजह बताई जाए, उसके बाद ही टीम को अंदर जाने दिया जाएगा.
खाली हाथ लौटी टीम
बताया जा रहा है कि वन विभाग के कर्मी पहले घर का ताला तोड़कर अंदर जाना चाहते थे, लेकिन लोगों के विरोध के कारण ऐसा नहीं हो सका. करीब डेढ़ घंटे तक बहस चली. आखिरकार सहमति बनी कि टीम के कुछ अधिकारी ही अंदर जाकर तलाशी लेंगे. इसके बाद आईएफएस प्रशिक्षु अधिकारी पुष्कर काले अपने बॉडीगार्ड और एक महिला पुलिसकर्मी के साथ घर के अंदर गए. करीब 10 मिनट तक तलाशी लेने के बाद टीम बाहर निकल आई.
हालांकि, इस कार्रवाई में पंकज राउत नहीं मिला और वन विभाग की टीम बिना गिरफ्तारी के लौट गई.
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