New Delhi : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देते हुए जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। पार्टी का आरोप है कि राज्य में आचार संहिता लागू रहने के दौरान महिलाओं को सीधे ₹10,000 की राशि प्रदान करना और अन्य कथित अवैध प्रथाएं चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।
याचिका में कहा गया है कि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़ना और उन्हें भुगतान करना भी अवैध है। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123 (भ्रष्ट आचरण) के तहत कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की है।
प्रशांत किशोर की पार्टी ने यह भी कहा है कि 25 से 35 लाख महिला मतदाताओं को सीधे लाभ हस्तांतरण चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करता है। इसके अलावा दोनों चरणों के मतदान के दौरान स्वयं सहायता समूह से जुड़ी लगभग 1.8 लाख महिला लाभार्थियों की मतदान केंद्रों पर तैनाती को भी अवैध और अनुचित बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में इस याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जायमॉल्या बागची की पीठ शुक्रवार को सुनवाई करेगी। याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट एस. सुब्रमण्यम बालाजी बनाम तमिलनाडु राज्य (2013) मामले के निर्देशों के अनुरूप निर्वाचन आयोग को मुफ्त योजनाओं, प्रत्यक्ष लाभ ट्रान्सफर और कल्याणकारी योजनाओं पर व्यापक दिशानिर्देश बनाने का निर्देश दे। साथ ही चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से कम से कम छह महीने पहले तक ऐसी योजनाओं के क्रियान्वयन की न्यूनतम समयसीमा तय करने की मांग की गई है।
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