Patna : बिहार सरकार ने राज्य में खुले में मांस और मछली बेचने पर रोक लगाने का बड़ा फैसला लिया है। अब बिना वैध लाइसेंस के चल रही मीट शॉप्स पर ताला लगेगा। नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से सभी शहरी निकायों को साफ निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। इस पूरे अभियान की कमान डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने संभाली है। उन्होंने साफ कहा है कि खुले में मांस-मछली बेचने की इजाजत अब किसी को नहीं दी जाएगी।
क्यों लिया गया यह फैसला?
सरकार का कहना है कि खुले में मांस-मछली की बिक्री से गंदगी फैलती है और संक्रमण का खतरा बढ़ता है। कई जगहों पर बिना ढके मांस बेचा जाता है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। विधानसभा के बजट सत्र में विजय सिन्हा ने कहा था कि स्वच्छता और लोगों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उनका साफ संदेश था “मीट शॉप चलानी है तो लाइसेंस लेना ही होगा, वरना दुकान बंद होगी।”
नगर निकायों को क्या निर्देश?
नगर विकास एवं आवास विभाग ने महापौर, नगर निगम अधिकारियों और शहरी निकायों को निर्देश दिया है कि :
- बिना लाइसेंस चल रही दुकानों की पहचान करें।
- तुरंत कार्रवाई कर उन्हें बंद करें।
- जिन दुकानों में गंदगी या नियमों का उल्लंघन हो रहा है, उन पर भी सख्ती करें।
- नियमित जांच अभियान चलाएं।
अब शहरों में निरीक्षण टीमें बनाई गई हैं, जो दुकानों की लाइसेंस, सफाई और मांस की गुणवत्ता की जांच कर रही हैं।
कई दुकानों पर लटका ताला
अभियान का असर शहरों में दिखने भी लगा है। कई जगहों पर बिना लाइसेंस चल रही मीट शॉप्स को बंद करा दिया गया है। दुकानदारों को चेतावनी दी गई है कि अगर दोबारा नियम तोड़े गए तो सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा।
जनता को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता बेहतर होगी। लोगों को साफ-सुथरा और सुरक्षित मांस मिलेगा। साथ ही अवैध दुकानों पर रोक लगने से कानून-व्यवस्था भी मजबूत होगी।
सरकार का साफ संदेश
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा है कि सरकार के लिए जनता का स्वास्थ्य और शहरों की स्वच्छता सबसे ऊपर है। इसलिए नियमों का पालन हर हाल में कराना ही होगा।
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