Ranchi : अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में राहत देखने को मिली। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के खत्म होने की उम्मीद के बीच वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में करीब 2% तक गिरावट दर्ज की गई।
गौरतलब है कि 28 फरवरी से इस क्षेत्र में तनाव बना हुआ था, जिससे दुनिया भर में तेल सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी। अब शांति की उम्मीदों ने बाजार को कुछ राहत दी है।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1% से ज्यादा गिरकर 97.99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड करीब 2% गिरकर 92.91 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। यह गिरावट पिछले कारोबारी दिन के उलट है, जब ब्रेंट क्रूड 5% की तेजी के साथ 99.39 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
भारतीय बाजार में भी इसका असर साफ दिखा। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कच्चे तेल की कीमतों में 2.6% तक की गिरावट आई और यह 8,625 रुपए के स्तर पर पहुंच गया। तेल की कीमतों में आई इस नरमी के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका की ओर से शांति प्रयास माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम का ऐलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिए हैं कि ईरान अगले 20 साल तक परमाणु हथियार न रखने की पेशकश कर चुका है।
राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के जरिए शांति की अपील करते हुए कहा कि अब समय हिंसा खत्म कर स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ने का है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ एक बड़ा समझौता जल्द हो सकता है।
हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। भारत में सेंसेक्स और निफ्टी सपाट स्तर पर खुले। एशियाई बाजारों में करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिका के वॉल स्ट्रीट में नैस्डैक और एसएंडपी 500 हल्की बढ़त के साथ बंद हुए।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में शांति वार्ता सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी, खासकर भारत जैसे देशों को, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं।
Also read : CBSE Class 10 Results: मिठाई बेचने वाले के बेटे का कमाल : 4 घंटे पढ़ाई कर बना जिला टॉपर

