जोहार लाइव ब्यूरो
आखिरकार नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने किसी मंत्री का इस्तीफा ले ही लिया. शनिवार 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने कहा क छात्रहित सर्वोपरी है. वो इसे तकनीकी की लड़ाई में नहीं उलझाएंगे.
उनके इस्तीफे के बाद कॉकरोज जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा, ये कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते. भाइयों, झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए.”
वहीं इस्तीफे पर देशभर के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा, “कांग्रेस पार्टी में हमने छात्रों का हरसंभव और पूरी मजबूती के साथ समर्थन करने की कोशिश की. राहुल गांधी लंबे समय से पेपर लीक और परीक्षा सुधार के मुद्दे को उठा रहे हैं. मेरा मानना है कि उन्हें लगातार दो या तीन साल से भी अधिक समय हो गया है, जब से वे इस मुद्दे को लगातार उठाते आ रहे हैं.
वो आगे कहती हैं, मेरा मानना है कि यह केवल शुरुआत है, लेकिन मैं वास्तव में बहुत खुश हूं. यह खबर सुनकर मैं थोड़ी भावुक भी हो गई, क्योंकि पिछले 10-12 वर्षों में मैंने कई बार खुद से पूछा था कि आखिर हमारे देश के युवा कब जागेंगे? देखिए, हमारे देश के साथ क्या किया जा रहा है. आरएसएस पूरे शिक्षा तंत्र में, हर पद पर और हर कुलपति की नियुक्ति तक अपनी विचारधारा स्थापित कर रहा है. हमारे पूर्वजों के विचारों को कमजोर किया जा रहा है. युवाओं के खिलाफ और विरोध में आवाज उठाने वाले हर व्यक्ति के खिलाफ बल का इस्तेमाल किया जा रहा है. आज मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि हमारे देश के युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है और अब कोई भी उनकी आवाज को दबाने की हिम्मत नहीं करेगा.”
यह लोकतंत्र की जीत है – सोनम वांगचुक
छात्रों की मांग के साथ भूख हड़ताल पर बैठने वाले प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुग ने कहा, ‘’यह लोकतंत्र की जीत है. यह सीधा लोकतंत्र है, जो सड़कों से निकला है. यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है. सीजेपी, देश की जेन-ज़ी और देश के हर उस नागरिक को बधाई, जिसने डर और डर के माहौल को पीछे छोड़कर देश के हर कोने से अपनी आवाज बुलंद की. अब जवाबदेही से आगे बढ़कर सुधारों की ओर कदम बढ़ाने का समय है.’’
जवाबदेही से बचा नहीं जा सकता – शशि थरुर
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा इस बात की स्वीकारोक्ति है कि लोकतंत्र में जवाबदेही से हमेशा के लिए बचा नहीं जा सकता. यह इस्तीफा उन छात्रों, अभिभावकों और देशभर के नागरिकों की हफ्तों तक चली शांतिपूर्ण और दृढ़ आवाज़ों के बाद आया है, जिन्होंने अनदेखा किए जाने से इनकार कर दिया.
यह ऐसे समय में भी आया है जब देश के कई युवा भारतीयों को अपने लोकतांत्रिक अधिकार के तहत शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने पर अनावश्यक पुलिस बल और बर्बरता का सामना करना पड़ा. यह ऐसी बात है, जिस पर हर नागरिक को चिंता होनी चाहिए, चाहे उसकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो.
वो आगे लिखते हैं, लेकिन जवाबदेही केवल इस्तीफे तक सीमित नहीं है. जिन गहरी संस्थागत और व्यवस्थागत विफलताओं ने इस स्थिति को जन्म दिया, अब उन्हें पारदर्शी सुधारों, संस्थागत जिम्मेदारी और इस संकल्प के साथ दूर करना होगा कि भविष्य में किसी भी युवा भारतीय का भविष्य फिर कभी इस तरह खतरे में न पड़े. जिन छात्रों ने मार्च निकाला, अपनी आवाज़ बुलंद की और शांतिपूर्ण ढंग से अपने आंदोलन को जारी रखा, उन्हें यह भरोसा मिलना चाहिए कि यह कहानी का अंत नहीं, बल्कि सुधार की शुरुआत है.
जिस ओर जवानी चलती है, जमाना चलती है – संजय सिंह
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक वीडियो जारी किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि, युवा शक्ति जिंदाबाद, छात्र शक्ति जिंदाबाद. जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता हैं. देश के करोड़ों युवाओं ने अपने आंदोलन के बदौलत कुम्भकरण की नींद में सो रही मोदी सरकार को जगाया और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर किया. पेपर लीक से शुरू हुई लड़ाई, रोज़गार तक जाएगी. इसके बाद अब देश में हर गलती की जवाबदेही तय होगी. आंदोलन के विजय की बधाई.
वो झुक गए – इमरान प्रतापगढ़ी
कांग्रेस के एक और सासंद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा, वो झुक गए हैं, उनकी ओर से जवाब आ गया है. बहादुरों बढ़े चलो कि इंक़लाब आ गया.

