नई दिल्ली. NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पिछले 10 दिनों से चल रहे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है. धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है.
अपने संदेश में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं. उनका मानना है कि एक मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की नींव होती है. उन्होंने कहा कि वह देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करते हैं.
NEET-UG में गड़बड़ी के बाद सरकार ने उठाए कदम
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आने के बाद भारत सरकार ने तुरंत इसका संज्ञान लिया. मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने की तारीख घोषित की गई. साथ ही, अगले वर्ष से NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में कराने का निर्णय लिया गया.
उन्होंने कहा कि इसके बाद सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा को सुचारू रूप से कराना था. इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और खासकर जिला प्रशासन ने मिलकर काम किया. छात्रों और उनके अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को परीक्षा पूरी कराई गई.

बोले- किसी मेधावी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही इस पूरे मामले की जिम्मेदारी ली और कभी भी परिस्थिति से मुंह नहीं मोड़ा. उनका संकल्प था कि परीक्षा माफिया की वजह से किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य खराब न हो और किसी छात्र के साथ अन्याय न होने पाए.
उन्होंने कहा कि 16 जुलाई को जारी NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे और गरीब परिवारों से आने वाले कई मेधावी छात्रों ने भी सफलता हासिल की. हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान भी जिम्मेदार पदों पर बैठे कुछ लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधा पैदा करने की कोशिश की, जिससे उन्हें बेहद दुख हुआ.
‘युवाओं को भ्रम के कुचक्र में नहीं फंसने देंगे’
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले 10 दिनों में जो घटनाक्रम सामने आया, उससे उनका मन दुखी है. उन्होंने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है. देश की युवाशक्ति ही भारत की असली ताकत है और युवाओं को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं दिया जा सकता.
जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में बने माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी चिंता है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें इस स्थिति का लाभ न उठा पाएं. देश की एकता बनी रहे और भारत के किसी भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, यही उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि बच्चों को अपना समय पढ़ाई और करियर बनाने में लगाना चाहिए.
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजने की बात कही.
अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार जताया. साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों समेत उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिनके साथ उन्हें काम करने का अवसर मिला. उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वह भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता और देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप से समर्पित रहेंगे.

