आंध्र प्रदेश के आदिवासी इलाकों में GO No. 3 के तहत मिले आरक्षण और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. अल्लूरी सीताराम राजू जिले के पाडेरू में 17 जुलाई को हजारों आदिवासियों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने सरकारी नौकरियों में आदिवासियों के लिए आरक्षण बहाल करने, आदिवासी जमीन की सुरक्षा के लिए 1/70 एक्ट को सख्ती से लागू करने और जिले को जोन-1 में बनाए रखने की मांग की. साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो 8 और 9 अगस्त को पूरे आदिवासी क्षेत्र में ‘मन्यम बंद’ किया जाएगा.
क्या है GO No. 3, जिसे लेकर विवाद है?
इस पूरे विवाद को समझने के लिए GO No. 3 को समझना जरूरी है. GO No. 3 आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से साल 2000 में जारी किया गया एक सरकारी आदेश था. इसके तहत अनुसूचित यानी आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की नियुक्ति में 100 फीसदी पद स्थानीय आदिवासियों के लिए आरक्षित किए गए थे.
आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब यह था कि आदिवासी इलाकों के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के दौरान वहां के स्थानीय आदिवासी युवाओं को ही नौकरी का अवसर दिया जाएगा. इसका उद्देश्य दोहरा था. पहला, आदिवासी युवाओं को सरकारी नौकरी में रोजगार का अवसर देना और दूसरा, आदिवासी इलाकों के स्कूलों में स्थानीय लोगों की नियुक्ति सुनिश्चित करना.
हालांकि, इस व्यवस्था को अदालत में चुनौती दी गई. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और 22 अप्रैल 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने GO No. 3 को रद्द कर दिया. इसके बाद आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति में 100 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था खत्म हो गई. तब से आदिवासी संगठन सरकार से मांग कर रहे हैं कि कोर्ट के फैसले के बाद आदिवासी युवाओं के रोजगार और प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने के लिए कोई वैकल्पिक कानूनी व्यवस्था बनाई जाए.
पाडेरू में क्यों हुआ प्रदर्शन?
इसी मांग को लेकर 17 जुलाई को आदिवासी गिरिजन संघम समेत कई संगठनों के नेतृत्व में हजारों आदिवासी पाडेरू में जुटे. प्रदर्शनकारी सरकारी जूनियर कॉलेज मैदान से मार्च करते हुए ITDA कार्यालय पहुंचे और वहां प्रदर्शन किया.
आदिवासी अधिकार राष्ट्रीय मंच (AARM) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य पी. अप्पलानारसा ने कहा कि सरकार ने अगर उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू से आदिवासी समुदाय से किए गए चुनावी वादों को पूरा करने की मांग की.
1/70 एक्ट और जोन-1 की मांग क्यों?
आदिवासी संगठनों की दूसरी बड़ी मांग 1/70 एक्ट को सख्ती से लागू करने की है. यह कानून अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी जमीन को गैर-आदिवासियों के हाथों जाने से रोकने के लिए बनाया गया है. संगठनों का कहना है कि कानून को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए, ताकि आदिवासी अपनी जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से वंचित न हों.
इसके अलावा अल्लूरी सीताराम राजू जिले को जोन-1 में बनाए रखने की मांग भी की गई है. आदिवासी नेताओं का कहना है कि इससे स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरियों और भर्ती में मिलने वाले अवसर सुरक्षित रहेंगे.
अराकू की सांसद तनुजा रानी ने चेतावनी दी कि अगर आदिवासियों की मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 8 और 9 अगस्त को पूरे आदिवासी क्षेत्र में ‘मन्यम बंद’ किया जाएगा. उन्होंने जरूरत पड़ने पर आंदोलन को दिल्ली तक ले जाने की भी बात कही.
फिलहाल आदिवासी संगठनों की नजर सरकार के अगले कदम पर है. अगर आरक्षण, 1/70 एक्ट और जोन-1 से जुड़ी मांगों पर जल्द कोई पहल नहीं हुई, तो अगस्त में प्रस्तावित ‘मन्यम बंद’ आंदोलन को और बड़ा रूप दे सकता है.

