Ranchi : राज्य के शिक्षण संस्थानों में लंबे समय से मिल रही नौकरियों के बाद राज्यपाल सह कुलपति ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी सरकारी शिक्षण संस्थानों में तृतीय और चतुर्थ वर्ग के पदों पर संविदा के आधार पर की जा रही नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
एजेंसियों के जरिए ही होगी नियुक्ति
राज्यपाल ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर विश्वविद्यालय सीधे नियुक्ति नहीं करेंगे। इसके बजाय राज्य सरकार के JAP-IT के जरिए सूचीबद्ध एजेंसियों से ही सेवाएं ली जाएंगी।
तीन साल का हिसाब मांगा
लोकभवन ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से पिछले तीन वर्षों में हुई संविदा नियुक्तियों का पूरा ब्योरा सात दिनों के भीतर मांगा है। इससे संकेत मिल रहा है कि इन नियुक्तियों की गहराई से जांच होगी।
OSD टू VC पद पर नियुक्तियां अवैध
राज्यपाल ने कुलपतियों के विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD to VC) के पद पर की गई नियुक्तियों को अवैध करार दिया है। ऐसे सभी कर्मियों को तुरंत उनके मूल पद पर वापस भेजने का निर्देश दिया गया है।
वित्तीय अनुशासन के लिए नए नियम
विश्वविद्यालयों के वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी सख्ती की गई है। अब कोई भी विश्वविद्यालय अपनी राशि चालू खाते में नहीं रख सकेगा। सभी फंड को बचत खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट में रखना होगा और बेहतर ब्याज देने वाले बैंक का चयन करना अनिवार्य होगा।
साथ ही 2026-27 के बजट को सीनेट या सिंडिकेट से मंजूरी लेकर लोकभवन को भेजना जरूरी किया गया है।
मानद डिग्री पर भी नियंत्रण
अब विश्वविद्यालय बिना अनुमति के डी.लिट या डीएससी जैसी मानद उपाधियां नहीं दे सकेंगे। इसके लिए पहले लोकभवन से स्वीकृति लेना अनिवार्य होगा।
एडवांस राशि का भी मांगा हिसाब
शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा लिए गए अग्रिम राशि का समायोजन कर 30 अप्रैल तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा, करेंगे पालन
रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार गुरु चरण साहू ने कहा कि लोकभवन से जारी सभी आदेशों का पालन किया जाएगा और तय समय सीमा में जरूरी कदम उठाए जाएंगे।


