केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह उनके समर्थन में उतर आई है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर उनके कार्यकाल की जमकर सराहना की. नेताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020), शिक्षा सुधारों और छात्रों के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके इस्तीफे को “बड़े सामाजिक हित” में लिया गया निर्णय बताया.
सौ से अधिक सुधार लागू किए – बी. एल. संतोष
BJP के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी. एल. संतोष ने अपने पोस्ट में लिखा, “श्री धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन की सफलतापूर्वक निगरानी की. उनके नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में 100 से अधिक बड़े और छोटे सुधार लागू किए गए. बड़े सामाजिक हितों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. हमें पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में भी वे देश और संगठन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे.”
शिक्षा नीति सफलतापूर्वक लागू किया – नितिन नवीन
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा, “केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान जी ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को सफलतापूर्वक लागू किया. शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल उनके कार्यकाल में शुरू हुईं. बड़े राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए पद छोड़ने का उनका निर्णय उनके नेतृत्व, जिम्मेदारी और सार्वजनिक जीवन के प्रति समर्पण को दर्शाता है.”
शिक्षा को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त किया – हिमंता विस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लिखा, “शब्दों में व्यक्त करना कठिन है कि मैं श्री धर्मेंद्र प्रधान जी के प्रति कितनी कृतज्ञता महसूस करता हूं. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने भारत की सभ्यतागत चेतना को पुनर्स्थापित करने और हमारी शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करने के लिए अथक परिश्रम किया. राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने की उनकी अटूट प्रतिबद्धता राष्ट्र निर्माण में उनके सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक रहेगी.”
उन्होंने आगे कहा, “व्यक्तिगत रूप से मैं हमेशा असम के प्रति उनके स्नेह से प्रभावित रहा हूं. जब भी असम को उनके सहयोग की आवश्यकता पड़ी, वे हमारे साथ खड़े रहे. हाल ही में आईआईएम गुवाहाटी का उद्घाटन भी उनके विज़न और उच्च शिक्षा को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने की उनकी प्रतिबद्धता का परिणाम था. उनके पद छोड़ने पर मैं उनके समर्पण, विनम्रता और भारत माता की सेवा के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं.”
शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए याद किया जाएगा – किरेन रिजिजू
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “सच्चे नेतृत्व की पहचान दशकों के सार्वजनिक जीवन से होती है और धर्मेंद्र प्रधान जी की यात्रा छात्र कल्याण तथा सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके आजीवन समर्पण का प्रमाण है.
केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके साथ काम करते हुए मैंने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनकी ईमानदार प्रतिबद्धता को करीब से देखा है. शिक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा.”
शिक्षा में महत्वपूर्ण सुधार किए – अमित मालवीय
BJP आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा, “धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से हटने के इस अवसर पर उनके सार्वजनिक जीवन को याद करना आवश्यक है, जो छात्रों, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के प्रति अटूट प्रतिबद्धता से परिपूर्ण रहा है. शिक्षा मंत्री बनने से बहुत पहले से ही उनका जीवन छात्र हितों और संगठनात्मक कार्यों से जुड़ा रहा है. उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई और शिक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए, जिनका प्रभाव आने वाले वर्षों तक दिखाई देगा.”
इससे पहले धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में कहा कि उन्होंने छात्रों के हित, शिक्षा व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने और नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया है. उन्होंने लिखा कि पिछले वर्षों में शिक्षा व्यवस्था में कई सुधार किए गए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में वे मानते हैं कि जवाबदेही तय करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है.
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब देशभर में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और छात्रों के भविष्य को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. विपक्ष और छात्र संगठनों ने इसे अपने आंदोलन की जीत बताया है. वहीं, BJP के नेताओं के लगातार आ रहे बयानों से साफ है कि पार्टी इस इस्तीफे को किसी विफलता के बजाय नैतिक जिम्मेदारी और बड़े सामाजिक हित में उठाया गया कदम बताने की कोशिश कर रही है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी किसे सौंपती है और परीक्षा सुधारों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को आगे कैसे बढ़ाया जाता है.
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