रांची. झारखंड में लोगों तक साफ और नियमित पानी पहुंचाने में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग अब एक्सपर्ट्स की मदद लेगा. विभाग ने IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय को अपने साथ जोड़ने की तैयारी की है. इन संस्थानों को विभाग का नॉलेज पार्टनर बनाया जाएगा.
इसे लेकर शुक्रवार को नेपाल हाउस में विभाग के सचिव अबू इमरान की अध्यक्षता में बैठक हुई. इसमें तीनों संस्थानों के प्रोफेसरों के साथ पेयजल योजनाओं को बेहतर तरीके से चलाने और उनकी देखरेख से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई. विभाग जल्द ही तीनों संस्थानों के साथ MoU करेगा.
कहां-कहां मिलेगी एक्सपर्ट्स की मदद?
पानी की पाइपलाइन में लीकेज होना बड़ी समस्या है. कई जगह लीकेज की वजह से पानी लोगों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है. अब IIT और दूसरे संस्थानों के विशेषज्ञ लीकेज पकड़ने, पाइपलाइन और जलापूर्ति योजनाओं की डिजाइन सुधारने और योजनाओं के रख-रखाव से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को दूर करने में मदद करेंगे.
पानी में आयरन-फ्लोराइड की भी होगी जांच
झारखंड के कई इलाकों में पानी में आयरन, फ्लोराइड और TDS की समस्या सामने आती रही है. अब इन इलाकों को लेकर संयुक्त रिसर्च की जाएगी. कोशिश होगी कि यह पता लगाया जाए कि पानी की गुणवत्ता खराब होने की वजह क्या है और इसका समाधान कैसे निकाला जा सकता है.
खनन इलाकों के पानी पर भी नजर
धनबाद और झरिया जैसे खनन क्षेत्रों में खनन और उससे होने वाले पर्यावरणीय बदलाव का असर जल स्रोतों पर भी पड़ता है. विभाग और अकादमिक संस्थान मिलकर यह देखेंगे कि इन इलाकों के जल स्रोतों पर कितना असर पड़ रहा है और उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखा जा सकता है.
विभाग का कहना है कि विशेषज्ञ संस्थानों के साथ काम करने से पेयजल योजनाओं की तकनीकी खामियों को बेहतर तरीके से समझने और उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी.
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