राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को भोपाल में RSS के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में जाति के आधार पर भेदभाव को हिंदू समाज के लिए कलंक बताया. उन्होंने कहा कि सभी लोग भारत माता और ईश्वर की संतान हैं, इसलिए मनुष्यों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए. जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है.
होसबाले ने कहा कि जाति के नाम पर समाज में होने वाले अलग-अलग तरह के बुरे व्यवहार समाज को कमजोर, दुर्बल और अंदर से खोखला करते हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग निस्वार्थ भाव से राष्ट्र के बारे में सोचते हैं, उन्हें बदलाव की शुरुआत अपने व्यवहार, अपने जीवन और अपने घर से करनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “हम जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करेंगे. यह हिंदू समाज पर एक कलंक है. हमें इस कलंक से मुक्त होने की जरूरत है.”
होसबाले ने कहा कि जाति आधारित भेदभाव केवल कानून के जरिए, ईश्वर के अवतार लेने या किसी के उपदेश देने से खत्म नहीं होगा. इसके लिए लोगों को अपने आचरण में बदलाव करना होगा. उन्होंने लोगों से जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करने का संकल्प लेने की अपील की.
RSS में लंबे समय से उठता रहा है सामाजिक समरसता का मुद्दा
जाति और छुआछूत के खिलाफ RSS के नेताओं के बयान नए नहीं हैं. 1974 में तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने छुआछूत खत्म करने पर जोर दिया था. 2006 में RSS प्रमुख के.एस. सुदर्शन ने जातिगत दीवारें तोड़ने और इसकी शुरुआत परिवार से करने की बात कही थी.
RSS प्रमुख मोहन भागवत भी कई मौकों पर जाति आधारित भेदभाव और जातिगत श्रेष्ठता के खिलाफ बोल चुके हैं. अक्टूबर 2022 में उन्होंने कहा था कि वर्ण और जाति व्यवस्था की मौजूदा प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है और समाज में भेदभाव पैदा करने वाली हर चीज को छोड़ देना चाहिए. फरवरी 2023 में संत रविदास जयंती के कार्यक्रम में उन्होंने जातिगत श्रेष्ठता के भ्रम को छोड़ने और सभी को समान मानने की बात कही थी.
2016 में RSS की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा ने सामाजिक समरसता पर प्रस्ताव पारित किया. इसमें जातिगत असमानता और छुआछूत जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म करने के लिए रोजमर्रा के व्यवहार में बदलाव पर जोर दिया गया था.
मार्च 2023 में दत्तात्रेय होसबाले ने भी अस्पृश्यता को “पाप और कलंक” बताते हुए इसे समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई थी. RSS ने सामाजिक समरसता को सामाजिक परिवर्तन के अपने पांच प्रमुख आयामों में शामिल किया था.
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