केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को नया केंद्रीय शिक्षा मंत्री नियुक्त किया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी. यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब शिक्षा मंत्रालय राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा सुधारों को लेकर चर्चा के केंद्र में है.
प्रल्हाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं. वह कर्नाटक के धारवाड़ लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके हैं. उनका जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुर (तत्कालीन बीजापुर) में हुआ था. उन्होंने हुब्बली के श्री कदसिद्देश्वर आर्ट्स कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और युवावस्था से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे.
संसद में दो दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले प्रल्हाद जोशी ने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली है. वर्ष 2019 से 2024 तक वह संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री रहे. वर्ष 2024 से वह उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे. अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.
राजनीतिक रूप से भी उनका लंबा अनुभव रहा है. वह 2014 से 2016 तक भाजपा की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष रहे और संगठन के साथ-साथ सरकार में भी कई अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं.
प्रल्हाद जोशी के सामने अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा सुधार, डिजिटल शिक्षा, शोध को बढ़ावा देने तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की कमान ऐसे समय में उनके हाथों में आई है, जब शिक्षा व्यवस्था को लेकर देशभर में व्यापक बहस चल रही है.
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